Bihar News : मौर्यालोक के 270 दुकानदारों और 39 कार्यालयों को पटना नगर निगम ने भेजा नोटिस, 7 दिनों की दी मोहलत, खुद का ऑफिस भी हैं डिफ़ॉल्टर
Bihar News : पटना में मौर्यालोक कॉम्प्लेक्स के 278 दुकानों और दफ्तरों को नोटिस भेजा गया है। सरकारी कार्यालयों पर भी लाखों रूपये बकाया है।
PATNA : राजधानी के प्रमुख व्यावसायिक केंद्र मौर्यालोक कॉम्प्लेक्स में बकाया मेंटेनेंस चार्ज और ग्राउंड रेंट को लेकर पटना नगर निगम ने सख्त रुख अपना लिया है। रविवार को हुई एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के बाद निगम ने परिसर की कुल 270 दुकानों और 39 कार्यालयों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है। लंबे समय से बकाये का भुगतान नहीं करने वाले इन आवंटियों को अब तय समय सीमा के भीतर अपनी देनदारी पूरी करनी होगी।
समीक्षा बैठक के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कॉम्प्लेक्स के दुकानदारों और कार्यालयों पर कुल 3,66,15,004 रुपये की भारी भरकम राशि बकाया है। नगर निगम ने राजस्व संरक्षण और सेवाओं के बेहतर संचालन के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। निगम प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि बकायेदारों को नोटिस जारी होने की तिथि से मात्र सात दिनों का समय दिया जाएगा, ताकि वे अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा कर सकें।
नगर निगम ने बकायेदारों को चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित नहीं किया गया, तो बिना किसी पूर्व सूचना के संबंधित दुकान या कार्यालय की बिजली और जलापूर्ति काट दी जाएगी। इसके अतिरिक्त, अनुबंध की शर्तों की अवहेलना करने वालों पर प्रशासनिक और विधिक कार्रवाई भी की जाएगी। भुगतान की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए निगम ने ऑनलाइन वेबसाइट और कार्यालय में जाकर काउंटर पर जमा करने, दोनों ही विकल्प उपलब्ध कराए हैं।
हैरानी की बात यह है कि बकायेदारों की सूची में केवल निजी दुकानदार ही नहीं, बल्कि खुद नगर निगम की अपनी जन्म-मृत्यु शाखा भी शामिल है, जिस पर लगभग 4.46 लाख रुपये का बकाया है। इसके अलावा बिहार राज्य सेवा संघ, बिहार काउंसिल ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, नाबार्ड, हुडको और पासपोर्ट कार्यालय जैसे प्रतिष्ठित सरकारी व अर्ध-सरकारी संस्थानों पर भी लाखों रुपये लंबित हैं। कई प्रमुख बैंकों को भी इस सूची में रखा गया है।
पटना नगर निगम ने अंत में सभी संबंधित आवंटियों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई और असुविधा से बचने के लिए समय-सीमा के भीतर भुगतान कर दें। निगम का कहना है कि यह सख्ती शहर की नागरिक सुविधाओं को सुचारु बनाए रखने के लिए आवश्यक है। अब यह देखना होगा कि इस कड़े नोटिस के बाद सरकारी और निजी संस्थान अपने बकाये का निपटारा कितनी जल्दी करते हैं।