Shambhu Girls Hostel: 'SIT तंग कर रही, आत्मदाह कर लेंगे'- परिजनों का आरोप, NEET छात्रा के कपड़े पर मिले वीर्य ने उधेड़ी पुलिस की कहानी

पीड़िता के पिता ने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे आत्मदाह जैसे कठोर कदम को मजबूर होंगे। परिजन चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज से न्यायिक जांच हो।

Semen on NEET Aspirant s Clothes Exposes Police Tale Kin Cry
'SIT तंग कर रही, आत्मदाह कर लेंगे'- फोटो : reporter

Shambhu Girls Hostel:राजधानी पटना की फिज़ाओं में एक बार फिर इंसाफ़ की चीख़ गूंज उठी है। नीट की तैयारी कर रही एक होनहार छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब महज़ हादसा नहीं, बल्कि दरिंदगी, लापरवाही और साज़िश की बदबू देने लगा है। मुन्नाचक इलाके के शंभू हॉस्टल में जहां किताबों और सपनों की दुनिया बसनी थी, वहीं अब ख़ामोशी, ख़ौफ़ और सवालों का सैलाब पसरा हुआ है।

इस सनसनीखेज़ मामले में बिहार पुलिस को आखिरकार अपनी ही कतारों में झांकना पड़ा। जिस कहानी को महीनों तक “नींद की दवा के ओवरडोज” का जामा पहनाकर पेश किया गया, उसे शनिवार को आई फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) रिपोर्ट ने सरेआम बेनकाब कर दिया। विज्ञान की चोट इतनी करारी रही कि पूरा पुलिस महकमा सवालों के घेरे में आ खड़ा हुआ।

6 जनवरी को छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी। हॉस्टल स्टाफ उसे तीन दिनों तक एक के बाद एक तीन अस्पतालों में घुमाता रहा। शुरुआती मेडिकल काग़ज़ात में कोमा और दवा की अधिक मात्रा की बात लिख दी गई। इलाज चला, मगर 11 जनवरी को छात्रा की मौत हो गई। फ़ाइलों में सब कुछ “कायदे-क़ानून” के मुताबिक दिखाया गया, लेकिन हक़ीक़त इससे कहीं ज़्यादा स्याह थी।

जैसे-जैसे तफ्तीश आगे बढ़ी, सच की परतें खुलती चली गईं। एफएसएल रिपोर्ट में छात्रा के शरीर और निजी अंगों पर चोट के निशान, कपड़ों पर स्पर्म (वीर्य) मिलने की पुष्टि ने पूरी कहानी पलट दी। यहीं से सवाल उठे—क्या यह हादसा था या किसी हैवानियत का नतीजा?

सबसे चौंकाने वाली बात यह कि 6 से 9 जनवरी तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। दावा किया गया कि शिकायत 9 जनवरी को दर्ज हुई, लेकिन उसके बाद भी न तो हॉस्टल सील किया गया, न वह कमरा जहां छात्रा बेहोश मिली थी। न फॉरेंसिक टीम बुलाई गई, न सबूतों को सुरक्षित किया गया। तीन दिन अस्पताल में रहने के बावजूद सबूत यूं ही मिटते रहे। यह महज़ लापरवाही नहीं, बल्कि तफ्तीश का क़त्ल है।

मीडिया के दबाव और एफएसएल रिपोर्ट से हुई फजीहत के बाद पुलिस हरकत में आई। चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 14/26 की समीक्षा के बाद कदमकुआं के अपर थानाध्यक्ष अवर निरीक्षक हेमंत झा और चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। मगर सवाल यहीं खत्म नहीं होते।

दरिंदगी की पुष्टि के बाद पीड़िता के परिजनों का सब्र जवाब दे गया है। पिता ने साफ कहा है कि एसआईटी जांच से उन्हें कोई भरोसा नहीं। उनका आरोप है कि छात्रावास संचालक दोषी हैं, लेकिन पुलिस की मिलीभगत से जांच को गलत दिशा दी जा रही है।पीड़िता के पिता ने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो वे आत्मदाह जैसे कठोर कदम को मजबूर होंगे। परिजन चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट के जज से न्यायिक जांच हो।

इधर एसआईटी एक बार फिर माता-पिता के ब्लड सैंपल लेने जहानाबाद पहुंची। यह पांचवीं बार होगा जब टीम वहां पहुंचेगी। सवाल यह है कि सच की तलाश है या परिजनों को ही कटघरे में खड़ा करने की कोशिश? पटना की सड़कों पर अब एक ही चर्चा है क्या इस केस में इंसाफ़ मिलेगा या फिर फाइलों में ही सच दफन हो जाएगा?