UGC New Act 2026: UGC बिल 2026 पर बिहार के नेताओं की चुप्पी से बवाल ! सवालों से बचते दिखे ललन सिंह, इस नेता ने कर दी बड़ी मांग

UGC New Act 2026: UGC बिल के विरोध में पटना में आज बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। सवर्ण समाज और करणी सेना के बैनर तले गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक पैदल मार्च निकाला जाएगा।

ललन सिंह की चुप्पी
सवालों से बचते दिखें ललन सिंह - फोटो : social media

UGC New Act 2026:  UGC बिल 2026 को लेकर देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन जारी है। लेकिन बिहार के शीर्ष नेताओं की चुप्पी लगातार सवाल के घेरे में आ रही है। सत्ता में मौजूद नेताओं से जब भी सवाल किया जा रहा तो वो या सवाल से बचते, बचकर भागते या सवाल को टालते नजर आ रहे हैं। इस मामले में अब तक किसी भी नेता ने खुलकर बात नहीं की है। वहीं दूसरी ओर कुछ नेताओं ने अपने ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बिहार के भी कई नेता इस बिल में सुधार लाने की बात पर सहमति जता रहे हैं। नवीननगर से जदयू विधायक चेतन आनंद ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।      

ललन सिंह ने साधी चुप्पी 

वहीं आज पटना एयरपोर्ट पर जब केंद्रीय मंत्री ललन सिंह से यूजीसी को लेकर सवाल किया गया तो वो भी सवाल से बचते नजर आएं। दरअसल, पटना एयरपोर्ट पर जब पत्रकारों ने उनसे UGC बिल को लेकर सवाल पूछे, तो उन्होंने मीडिया से बातचीत करने से इनकार करते हुए बिना कोई प्रतिक्रिया दिए आगे बढ़ना ही उचित समझा। वहीं जब नित्यानंद राय से सवाल किया गया था तब उन्होंने भी सवाल को टालते हुए हर हर महादेव का नारा लगाने लगे। पत्रकारों ने ललन सिंह से लगातार सवाल किए कि, आप सवर्ण समाज के बड़े नेता माने जाते हैं, UGC बिल पर आपका क्या रुख है? क्या यह कानून संतुलित है? लेकिन ललन सिंह ने किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। उनकी यह चुप्पी अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं के केंद्र में आ गई है। 

पटना में आज बड़ा प्रदर्शन

इधर, UGC बिल के विरोध में पटना में आज बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। सवर्ण समाज और करणी सेना के बैनर तले गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक पैदल मार्च निकाला जाएगा। प्रदर्शनकारी इस बिल को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताते हुए इसे ‘काला कानून’ करार दे रहे हैं।

जेडीयू विधायक चेतन आनंद ने उठाए सवाल

UGC बिल पर जेडीयू विधायक चेतन आनंद ने कुछ प्रावधानों पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि कॉलेज छात्रों से संवाद के दौरान यह बात सामने आई कि जातिगत भेदभाव करने वालों पर कार्रवाई जरूरी है, लेकिन कानून के दुरुपयोग को भी रोका जाना चाहिए। चेतन आनंद ने कहा कि, अगर कोई सवर्ण छात्र जातिगत भेदभाव करता है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन अगर किसी को आपसी रंजिश में फंसाया जाए, तो फंसाने वाले पर भी सख्त कार्रवाई जरूरी है। उन्होंने 2012 के नियमों का हवाला देते हुए पूछा कि उस समय गलत आरोप साबित होने पर जुर्माने का प्रावधान था, तो नए नियमों में इसे क्यों हटाया गया?

तेज प्रताप यादव का समर्थन

दूसरी ओर जेजेडी अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने UGC के नए नियमों का खुला समर्थन किया है। उन्होंने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह कानून सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत लाया गया है और इसका मकसद विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में जातिगत भेदभाव को रोकना है। कांग्रेस ने UGC बिल को लेकर हो रही चर्चाओं को एकतरफा बताया है। पार्टी का कहना है कि कानून के दुरुपयोग की संभावनाओं पर भी गंभीरता से चर्चा होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि इस मुद्दे पर अफवाहें फैलाकर समाज को गुमराह किया जा रहा है।

UGC के नए नियमों पर विवाद क्यों?

UGC ने 13 जनवरी को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन्स, 2026’ को नोटिफाई किया था। इसके तहत कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें गठित करने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह नियम उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लाए गए हैं। हालांकि, जनरल कैटेगरी के छात्रों और संगठनों का आरोप है कि इससे उन्हें ‘स्वाभाविक अपराधी’ की तरह देखा जा रहा है और कैंपस में अराजकता बढ़ सकती है।