Bihar Land:भूमि माफिया पर विजय सिन्हा का करारा प्रहार, 45 दिन में फर्जी जमाबंदी खत्म करने का आदेश, गड़बड़ी करने पर सीओ भी नपेंगे, जान लें नया नियम

नीतीश सरकार ने ऐसा आदेश जारी किया है, जिसे भूमि माफिया के खिलाफ सीधा फरमान माना जा रहा है। सरकार ने तय कर दिया है कि अब सरकारी जमीन पर किसी भी तरह की अवैध या संदिग्ध जमाबंदी अधिकतम 45 दिनों के भीतर रद्द कर दी जाएगी...

Vijay Sinha Cracks Down on Land Mafia
भूमि माफिया पर विजय सिन्हा का करारा प्रहार- फोटो : social Media

Bihar Land: बिहार की राजनीति में लंबे अरसे से सरकारी जमीन पर फर्जी जमाबंदी का मसला एक बड़ा सियासी ज़ख्म बना हुआ था। विपक्ष इसे सुशासन की पोल बताता रहा, तो सत्ता पक्ष इसे विरासत में मिली बीमारी करार देता रहा। अब इस सियासी बहस के बीच नीतीश सरकार ने ऐसा आदेश जारी किया है, जिसे भूमि माफिया के खिलाफ सीधा फरमान माना जा रहा है। सरकार ने तय कर दिया है कि अब सरकारी जमीन पर किसी भी तरह की अवैध या संदिग्ध जमाबंदी अधिकतम 45 दिनों के भीतर रद्द कर दी जाएगी, और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने राज्य के सभी जिलों के एडीएम को साफ हिदायत दी है कि सरकारी जमीन से जुड़ी गलत, फर्जी या अवैध जमाबंदी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच के बाद राजस्व न्यायालय में इस पर सुनवाई होगी और जरूरत पड़ने पर एडीएम अपने सुओ-मोटो अधिकार का इस्तेमाल करते हुए कार्रवाई करेंगे। यानी अब किसी शिकायत या आवेदन के इंतजार की भी अनिवार्यता नहीं रहेगी।

सरकार ने साफ किया है कि 3 जून 1974 से अंचल अधिकारी अपने-अपने अंचल की सरकारी जमीन के लिए कलेक्टर घोषित हैं। अगर उनके कार्यकाल में सरकारी जमीन का अवैध हस्तांतरण, निजी व्यक्तियों के नाम जमाबंदी खोलने या दाखिल-खारिज का मामला सामने आता है, तो उन पर अनुशासनिक कार्रवाई तय है। यह आदेश सिर्फ जमीन माफिया ही नहीं, बल्कि लापरवाह अफसरों के लिए भी सियासी चेतावनी है।

फर्जी जमाबंदी की पहचान और उसे रद्द करने की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध कर दिया गया है। जांच से संतुष्ट होने के बाद एडीएम आरसीएमएस पोर्टल के जरिए रद्दीकरण की प्रक्रिया शुरू करेंगे। आवेदन मिलने के तीन दिन के भीतर नोटिस जारी होगा। अधिकतम 15 दिनों में तीन बार सुनवाई होगी और सात दिनों के भीतर लिखित स्टेटमेंट लिया जाएगा। अंतिम आदेश जारी कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

इस आदेश के दायरे में सरकारी विभागों, बोर्ड और निगमों की जमीन, खास महाल, धार्मिक न्यास बोर्ड और मान्यता प्राप्त ट्रस्ट की जमीन, गैर मजरुआ आम भूमि, नगर निगम व पंचायत की जमीन, गौशाला, केंद्र सरकार की जमीन और कैसर-ए-हिंद की जमीन शामिल है। सियासी तौर पर देखें तो यह फैसला नीतीश सरकार का वह कदम है, जिससे वह सुशासन के अपने दावे को जमीन पर उतारने की कोशिश में जुटी है।