Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल पर जदयू के वो 5 सुझाव जिसे केंद्र ने माना, सीएम नीतीश की पार्टी के दावे से आया सियासी भूचाल

Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन बिल को लेकर जदयू ने बड़ा दावा किया है। जदयू ने बताया है कि केंद्र सरकार ने उनके द्वारा दिए गए 5 सुझाव को माना जिसके बाद पार्टी ने समर्थन दिया....पढ़िए आगे...

वक्फ संशोधन बिल
वक्फ बिल पर जदयू के 5 सुझाव - फोटो : social media

Waqf Amendment Bill: वक्फ संशोधन विधेयक 2025 अब कानून बन गया है। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन से पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति द्रौपदी ने भी मंजूरी दे दी है। जिससे यह विधेयक कानून बन गया है। यह विधेयक संसद के दोनों सदनों में गरमागरम बहस के बाद पारित हुआ था। लोकसभा में इसे 2 अप्रैल 2025 को पेश किया गया और 288 मतों से पारित किया गया, जबकि राज्यसभा में इसे 4 अप्रैल 2025 को 128 मतों से समर्थन मिला। वहीं वक्फ संशोधन बिल को संसद और राज्यसभा में समर्थन देने के बाद जदयू विपक्ष के निशाने पर आ गई है। जिसके बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने शनिवार को पार्टी प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी स्थिति स्पष्ट की। अल्पसंख्यक नेताओं की मौजूदगी में पार्टी ने कहा कि जदयू ने बिल का समर्थन इसीलिए किया क्योंकि केंद्र सरकार ने उनके द्वारा दिए गए सभी पांच प्रमुख सुझावों को स्वीकार कर लिया था।

जदयू के पांच सुझाव, जिन्हें केंद्र ने माना

जदयू की प्रदेश प्रवक्ता अंजुम आरा ने बताया कि पार्टी की ओर से वक्फ संशोधन बिल को लेकर जिन पांच बिंदुओं को प्रस्तावित किया गया था, उन्हें केंद्र सरकार ने संशोधित बिल में शामिल कर लिया।

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भूमि राज्य का विषय है – इसलिए नए कानून में भी राज्यों की प्राथमिकता बनी रहे।

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कानून पूर्व प्रभावी न हो – संशोधन पूर्व की तारीख से लागू नहीं किया जाए।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा – जो संपत्तियां निबंधित नहीं हैं लेकिन उन पर मस्जिद, दरगाह आदि धार्मिक स्थल बने हैं, उन्हें यथावत रखा जाए।

विवाद निपटान का अधिकार – वक्फ संपत्ति से जुड़े मामलों का समाधान जिलाधिकारी से ऊपर के अधिकारी करें।

डिजिटाइजेशन की समयसीमा बढ़े – वक्फ संपत्ति के डिजिटाइजेशन के लिए 6 माह की समयसीमा को आगे बढ़ाया जाए।

राजद ने नहीं दिए कोई सुझाव

जदयू अल्पसंख्यक नेताओं ने प्रेस वार्ता में दावा किया कि पार्टी सांसद दिलकेश्वर कामत बिल पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के सदस्य थे और उन्होंने जदयू की ओर से सक्रिय भागीदारी की। जबकि राजद (RJD) ने समिति को कोई भी सुझाव नहीं दिया जो कि गंभीर लापरवाही का संकेत है।

नीतीश कुमार पहले ही ले चुके थे वक्फ हितों की पहल

जदयू ने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वक्फ संशोधन बिल से काफी पहले ही बिहार में वक्फ की बेहतरी के लिए वक्फ विकास बोर्ड का गठन किया था। इसके तहत ₹110 करोड़ की राशि आवंटित की गई। जिससे अल्पसंख्यक छात्रावास, विवाह भवन और बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण कराया गया। पटना का अंजुमन इस्लामिया हॉल इसका प्रमुख उदाहरण है।

पार्टी लाइन से नाराज़ नेता भी आए साथ

वक्फ संशोधन बिल को लेकर जदयू के कुछ अल्पसंख्यक नेता नाराज चल रहे थे लेकिन शनिवार को प्रेस वार्ता में उन्होंने पार्टी स्टैंड का समर्थन किया। इनमें विधान पार्षद गुलाम गौस और पूर्व सांसद अस्फाक करीम भी शामिल रहे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व राज्यसभा सदस्य कहकशां परवीन, विधान पार्षद आफाक अहमद खान, खालिद अनवर, पूर्व विधान पार्षद सलीम परवेज, सुन्नी वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष इरशादुल्लाह, शिया वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद अफजल अब्बास, जदयू महासचिव आसमां परवीन और अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अशरफ अंसारी भी उपस्थित रहे।