Bihar News: सीएम नीतीश की बड़ी सौगात, महिलाओं के लिए क्यों खास है अपना घर योजना, जानिए कामकाजी महिलाओं को क्या-क्या मिलेगा- कब से मिलेगा
Bihar News: राज्य सरकार ने प्रदेश की कामकाजी महिलाओं के लिए एक अहम और दूरगामी पहल करते हुए सुरक्षित छात्रावास संचालन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है।
राज्य सरकार ने प्रदेश की कामकाजी महिलाओं के लिए एक अहम और दूरगामी पहल करते हुए सुरक्षित छात्रावास संचालन की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री नारी सुरक्षा योजना के तहत पटना, गयाजी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर में कामकाजी महिला छात्रावास शुरू किए जा रहे हैं। इस फैसले को महिला सशक्तिकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की राजनीति में मील का पत्थर माना जा रहा है।
इन छात्रावासों का उद्देश्य उन महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराना है, जो दूसरे जिलों या राज्यों से आकर बिहार में सरकारी या गैर-सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं और अकेले रहकर नौकरी करने को मजबूर हैं। सरकार ने इसके लिए आय की सीमा भी तय की है। छात्रावास का लाभ वही महिलाएं उठा सकेंगी, जिनकी मासिक आय अधिकतम 75 हजार रुपये तक है। प्रत्येक छात्रावास की क्षमता 50 बेड की होगी।
महिला विकास निगम इन छात्रावासों का संचालन अपना घर मॉडल पर करेगा, ताकि यहां रहने वाली महिलाओं को सिर्फ छत ही नहीं, बल्कि घर जैसा माहौल भी मिल सके। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, छात्रावास में रहने के लिए कोई किराया नहीं देना होगा। महिलाओं को केवल भोजन का खर्च वहन करना होगा, जो तीन हजार रुपये प्रति माह निर्धारित किया गया है।
सुविधाओं की बात करें तो छात्रावास में बेड, टेबल-कुर्सी, 24 घंटे बिजली, शुद्ध पेयजल के लिए आरओ, टीवी, मुफ्त वाई-फाई जैसी आधुनिक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सुरक्षा को लेकर भी विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं, ताकि महिलाओं को किसी तरह की असहजता या भय का सामना न करना पड़े।
प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। छात्रावास अधीक्षक, सहायक अधीक्षक, रसोइया और अन्य कर्मियों का चयन कर लिया गया है। समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने बताया कि पटना में गोला रोड स्थित छात्रावास से इसकी शुरुआत होगी और जनवरी से आवेदन लिए जाएंगे।
इच्छुक महिलाएं महिला एवं बाल विकास निगम के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगी। अगले माह छात्रावास पूरी तरह तैयार होने के बाद आवेदन प्रक्रिया शुरू होगी। आवंटन पहले आओ–पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा, इसके बाद काउंसलिंग प्रक्रिया से चयन होगा। इसके लिए नियुक्ति पत्र, पे-स्लिप, पहचान पत्र, जिले में कार्यरत होने का प्रमाण, स्थानीय अभिभावक का विवरण और दिव्यांगता से जुड़े प्रमाणपत्र (यदि लागू हों) देना अनिवार्य होगा।
बहरहाल यह पहल नारी सुरक्षा योजना को कागज से निकालकर जमीन पर उतारने की कोशिश है। सुरक्षित आवास मिलने से महिलाएं बेखौफ होकर काम कर सकेंगी और यह कदम बिहार में महिला सुरक्षा, सामाजिक भरोसे और आत्मनिर्भरता की राजनीति को नई मजबूती देगा।