Patna-Purnia Expressway: क्या फ्लॉप हो जाएगा पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे? 400 से ज्यादा आपत्तियों ने फंसाया पेंच, संकट में नीतीश सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट!
Patna-Purnia Expressway: पटना पूर्णिया एक्सप्रेस-वे निर्माण का कार्य तेजी से जारी है। अब जमीन अधिग्रहण के पचड़े में बुरी तरह फंसता नजर आ रहा है। लेकिन करीब 400 से अधिक आपत्तियां भी दर्ज की गई है।
Patna-Purnia Expressway: बिहार के महत्वाकांक्षी सड़क प्रोजेक्ट में शामिल पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे पर अचानक संकट के बादल मँडराने लगे हैं। जिस प्रोजेक्ट को उत्तर बिहार की लाइफलाइन कहा जा रहा था, वह अब जमीन अधिग्रहण के पचड़े में बुरी तरह फंसता नजर आ रहा है। समस्तीपुर में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू तेज हो गई है, लेकिन करीब 400 से अधिक आपत्तियां भी दर्ज की गई है। जिनका निपटारा करने में अब प्रशासन जुट गया है।
400 से अधिक आपत्तियां दर्ज
दरअसल, समस्तीपुर जिले से होकर गुजरने वाली प्रस्तावित पटना–पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे परियोजना का गजट प्रकाशित हो चुका है और दावा-आपत्ति का दौर भी शुरू हो गया है। अब तक 400 से अधिक आपत्तियां दर्ज की जा चुकी हैं, जिनके निस्तारण में जिला प्रशासन जुटा हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को केंद्र सरकार से वित्तीय मंजूरी मिल चुकी है। एक्सप्रेस-वे का निर्माण पीपीपीएसी के तहत हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) में किया जाएगा, जिसमें 40 प्रतिशत लागत सरकार और 60 प्रतिशत निर्माण एजेंसी वहन करेगी। एजेंसी अपनी लागत की वसूली टोल के जरिए करेगी।
दो चरणों में होगा निर्माण
समस्तीपुर जिले के भीतर परियोजना को दो पैकेज में बांटा गया है। पहला पैकेज वैशाली के मीरनजर अरेजी से रोसड़ा के भिरहा तक 84.5 किलोमीटर लंबा होगा। जिस पर करीब 10,083.96 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दूसरा पैकेज भिरहा से सरौंजा तक 51.835 किलोमीटर का होगा। जिसकी लागत 8,564.82 करोड़ रुपये आंकी गई है। पटना से पूर्णिया तक पूरी परियोजना तीन चरणों में पूरी की जाएगी।
राज्य का पहला आंतरिक एक्सप्रेस-वे
यह बिहार का पहला ऐसा एक्सप्रेस-वे होगा जो पूरी तरह राज्य की सीमाओं के भीतर निर्मित होगा। चार लेन के रूप में बनने वाला यह एक्सप्रेस-वे भविष्य में छह लेन तक विस्तारित किया जा सकेगा। इस एक्सप्रेस-वे के निर्माण के बाद पटना से पूर्णिया की दूरी महज तीन घंटे में तय की जा सकेगी। परियोजना के तहत जिला मुख्यालयों को जोड़ने के लिए संपर्क सड़कों का भी निर्माण किया जाएगा। कुल 2236.003 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी। जिसमें वन, सरकारी और निजी जमीन शामिल है।
कई प्रखंडों से गुजरेगा मार्ग
एक्सप्रेस-वे का प्रवेश समस्तीपुर जिले में मोरवा प्रखंड के लडुआ से होगा। इसके बाद यह सरायरंजन, उजियारपुर, विभूतिपुर, खानपुर होते हुए रोसड़ा और आगे सहरसा की ओर जाएगा। इस परियोजना से समस्तीपुर, दलसिंहसराय और रोसड़ा जैसे शहरों के विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। समस्तीपुर रेलवे जंक्शन के साथ मजबूत सड़क नेटवर्क जुड़ने से यह क्षेत्र एक बड़े व्यापारिक हब के रूप में विकसित हो सकता है।
रोजगार और निवेश के नए अवसर
एक्सप्रेस-वे बनने के बाद सड़क किनारे पेट्रोल पंप, ढाबे, लॉजिस्टिक्स हब और छोटे-बड़े उद्योग विकसित होने की संभावना है। इससे स्थानीय युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे। वहीं जमीन और संपत्तियों की कीमतों में भी बढ़ोतरी होगी। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है और प्राप्त दावों के शीघ्र निस्तारण की दिशा में कार्य किया जा रहा है, ताकि परियोजना को जल्द से जल्द आगे बढ़ाया जा सके।