महिला हवलदार का शव पहुंचते ही गांव में पसरा मातमी सन्नाटा, मां की शोक में बच्चों का रो रो कर बुरा हाल..

महिला हवलदार का शव पहुंचते ही गांव में पसरा मातमी सन्नाटा, मां की शोक में बच्चों का रो रो कर बुरा हाल..

PATNA : जहानाबाद में कैदी की मौत के बाद हुए बवाल में मारी गईं महिला हवलदार कांति देवी का शव जैसे ही नौबतपुर के आदमपुर गांव उसके ससुराल पहुंचा, पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसर गया। सुबह से ही लोग कांति देवी के शव को गांव पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। मां की मौत का गम उनके पांचों बच्चों के चेहरे पर साफ झलक रहा था। एक तरफ कांति देवी के बेटे चंदन और पप्पू अपनी मां के गम को भुला नहीं पा रहे थे वहीं दूसरी तरफ कांति देवी की बेटियों में मुन्नी, कंचन और चंचल का रो रो कर बुरा हाल था। पति रामबाबू साहू अपनी पत्नी के मौत का गम भुलाए नहीं भूल पा रहे थे। 

बता दें कि कि औरंगाबाद जिले के दाउदनगर उपकार आके विचाराधीन बंदी गोविंद मांझी की इलाज के दौरान मौत के बाद उपजे विवाद में उपकाराची हवलदार कांति देवी की इसी दुर्घटना के दौरान मौत हो गई थी। कांति देवी का माई के खगड़िया में है जबकि उनका ससुराल नौबतपुर थाना क्षेत्र के आदमपुर गांव में है। हादसे की सूचना के बाद ही नौबतपुर के आदमपुर गांव उनके ससुराल में मातमी सन्नाटा पसरा था। सब लोग घर के आगे कांति देवी के शव को आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे ही कांति देवी का मृत शरीर आदमपुर गांव पहुंचा चारों तरफ चित चित कार से पूरा माहौल गम में डूब गया। लोगों की जुबान पर बस एक ही बात थी काश ऐसा ना होता। आंखों में आंसू और दिल में गम का सैलाब लिए लोगों ने दुख ही मन से कांति देवी के अंतिम दर्शन के लिए गांव के लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। जहां एक तरफ हवलदार कांति देवी वहीं दूसरी तरफ जहानाबाद एसपी ऑफिस में पदस्थापित उनके पति रामबाबू साहू दोनों पति-पत्नी ने मिलकर अपने बच्चों और परिवार के लिए एक सुनहरा सपना देखा था जो आज पूरी तरह बिखरता नजर आ रहा था। 

हालांकि परिवारिक जीवन में कांति देवी ने अपने पांचों बच्चों को शादी कर अपने जीवन को खुशी में बना दिया था। कांति देवी का अंतिम संस्कार दीघा घाट पर शनिवार की देर रात कर दिया गया। आसपास के ग्रामीणों की माने तो कांति देवी और उनके पति राम बाबू दोनों काफी मिलनसार किस्म के व्यक्तित्व के लोग थे और गांव के लोगों के बीच छुट्टी के समय में जब भी आते वे उनके बीच बैठकर समय बिताया करते थे। अब उनकी यादें ही शेष बची है जिसे लोग याद कर आज भी गम में डूब जाते हैं।

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