चुनाव से पहले दलित और पढ़े लिखे चेहरे अशोक चौधरी पर नीतीश ने खेला दांव, सांगठनिक क्षमता और दलित वोट का JDU को मिल सकता है फायदा

चुनाव से पहले दलित और पढ़े लिखे चेहरे अशोक चौधरी पर नीतीश ने खेला दांव, सांगठनिक क्षमता और दलित वोट का JDU को मिल सकता है फायदा

PATNA : बिहार चुनाव की रणभेरी बजने के बाद अब सूबे की सियासत में लगातार बदलाव देखा जा रहा है. इस चुनाव में अपनी जीत पक्की करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष लगातार नए नए दांव चल रहा है. सियासी जमीन पर पकड़ और वोट ट्रांसफर करवाने वाले नेताओं पर पार्टी के मुखिया भरोसा कर रहे हैं. इस सिलसिले में नीतीश कुमार ने बिहार के भवन निर्माण मंत्री डॉ अशोक चौधरी को जदयू का प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है.

दलित और पढ़े लिखे चेहरे पर खेला नीतीश ने दांव
  जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर प्रदेश जदयू अध्यक्ष व सांसद वशिष्ठ नारायण सिंह ने डॉ चौधरी को कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया है. प्रदेश अध्यक्ष सिंह ने रविवार को जारी विज्ञप्ति में कहा है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की सहमति से अशोक चौधरी मेरी अनुपस्थिति में बतौर कार्यकारी अध्यक्ष पार्टी का कामकाज देखेंगे. चुनाव से ठीक पहले अशोक चौधरी को ये बड़ी जिम्मेदारी सीएम नीतीश कुमार ने सौंपी है. जानकार बताते है कि अशोक चौधरी बड़े लिखे और दलित चेहरा हैं. 

मंत्रीअशोक चौधरी दलित समुदाय से आते हैं. लेकिन अपने व्यक्तित्व और सांगठनिक क्षमता की वजह से फिलहाल वे नीतीश कुमार के बेहद खास बने हुए हैं. अशोक चौधरी तकनीकी के इस्तेमाल में बेहद तेज तर्रार माने जाते हैं. इसलिए उन्हें पार्टी का कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है. वो युवा होने के साथ-साथ कुशल रणनीतिकार भी माने जाते हैं. ऐसा बताया जा रहा है कि यही वजह है कि कोरोना काल में हो रहे चुनाव में वर्चुअल रैली का जिम्मा भी अशोक चौधरी ने ही संभाला था और उसे सफल भी बनाया था. अब सीएम नीतीश कुमार ने अशोक चौधरी पर भरोसा करते हुए बड़ी जिम्मेदारी उन्हें दी है. राजनीतिक जानकारों का यह मानना है कि चुनाव से पहले मिली इस जिम्मेदारी और दलित वोट को ट्रांसफर करवाने में चौधरी सफल होंगे.

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