'चंद्रशेखर' से पहले एक और 'मंत्री' ACS से लड़कर अपनी 'फजीहत' करा चुके हैं ! संयोग देखिए...तब भी जुलाई महीना ही था..

PATNA: बिहार के शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर और विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के बीच विवाद चरम पर है. मंत्री ने अपर मुख्य सचिव को पीत पत्र लिखा. इसके बाद विवाद सार्वजनिक हो गया. केके पाठक ने पीत पत्र का जो जवाब दिया उसकी कल्पना शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने कभी नहीं की होगी. आईएएस अफसर ने न सिर्फ करारा जवाब दिया बल्कि मंत्री के पीएस को दफ्तर में घुसने पर पाबंदी लगा दी. यह आदेश निकालकर अपर मुख्य सचिव ने शिक्षा मंत्री को खुली चुनौती दे डाली. केके पाठक के इस फऱमान के बाद शिक्षा मंत्री की बोलती बंद है. वैसे दो साल पहले जुलाई महीने में ही एक मंत्री अपने सचिव से टकरा कर फजीहत करा चुके हैं. वो मंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से हैं.
चंद्रशेखर ने करा ली अपनी फजीहत
शिक्षा मंत्री चंद्रशेखर ने पीत पत्र लिखने का खेल शुरू किया. मंत्री अपने पीएस के माध्यम से विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक को पीत लिखकर गंभीर आरोप लगाए. पीत पत्र का जो जवाब आया, बिहार की राजनीति में शायद ही किसी मंत्री को मिला हो. दरअसल, जून महीने में मंत्री स्तर से अफसरों का स्थानांतरण-पदस्थापन की प्रक्रिया पूरी की जाती है. इस बार भी अधिकांश विभाग में अफसरों के तबादले हुए. शिक्षा विभाग इससे वंचित रहा. अधिक जरूरत होने पर अपर मुख्य सचिव केके पाठक अतिरिक्त प्रभार देकर काम चला रहे. जून बीतने के साथ ही जुलाई की शुरूआत हुई. शिक्षा मंत्री इस बार तबादला नहीं कर सके. जुलाई महीने में मंत्री चंद्रशेखर ने पीत पत्र लिखा और विभागीय अपर मुख्य सचिव पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि पीत पत्र में अफसरों के तबादले को लेकर कोई जिक्र नहीं है. फिर भी चर्चा है कि मंत्री तबादला नहीं कर सके, इसकी खीझ उतारी है. वजह तलाशा गया कि विभाग के अधिकारी मीडिया में बने रहने के लिए तरह-तरह के हथकंड़ा अपना रहे. इसके अलावे कई अन्य आरोप भी मंत्री द्वारा लगाए गए।
1 जुलाई 2021 को मंत्री ने इस्तीफे का किया था ऐलान
अब हम आपको दो साल पहले लिए चलते हैं. 1 जुलाई 2021 को नीतीश कैबिनेट के एक मंत्री ने बड़ा विस्फोट किया था. आरोप लगाया था कि हमारी बात चपरासी तक नहीं सुनता. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू कोटे से समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने सीएम नीतीश और उनके अफसरों पर आरोप लगाकर सनसनी फैला दी थी. तब मदन सहनी ने कहा था, '' अब बर्दाश्त नहीं हो रहा। मेरे महकमे में अधिकारी तो छोड़ दीजिए, चपरासी तक मेरी बात नहीं मानते। अफसरों की तानाशाही वर्षों से झेल रहा हूं। इसलिए अब मंत्री पद छोड़ना ही एकमात्र विकल्प है'' . मदन सहनी ने कहा था कि सिर्फ सुविधा भोगने के लिए मैं मंत्री नहीं रह सकता। इतने बड़े बंगले में रहूं, यह ठीक नहीं, क्योंकि गरीबों का कुछ भला ही नहीं कर सकता हूं। इस संबंध में किसी को कहने का कोई फायदा नहीं होने वाला। जिसे बंगला में रहने और पांच गाड़ी के आगे-पीछे चलने का शौक है, वह मंत्री पद पर बना रहे, लेकिन मैैं नहीं रह सकता हूं।
1 जुलाई को हुए विस्फोट में भी तबादले से जुड़ी एक फाइल थी
तब कहा गया था कि मामला 134 बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) के तबादले से जुड़ा है। इस बारे में मंत्री की ओर से कहा जा रहा था कि सूची में जिनके नाम दर्ज हैं, वे सभी तीन वर्ष से अधिक समय से एक जगह पर जमी हैं। उनके स्थानांतरण के लिए फाइल विभाग के अपर मुख्य सचिव के पास गई, लेकिन लौटी नहीं। केवल 18 का ही तबादला हुआ। समाज कल्याण मंत्री को जिन 134 सीडीपीओ के तबादले नहीं होने पर गुस्सा था .वह फाइल विभाग के अपर मुख्य सचिव के दफ्तर से मुख्य सचिव के पास पहुंच गई थी. मंत्री मदन सहनी ने कई दिनों तक हाई वोल्टेज ड्रामा किया. इसके बाद सीएम नीतीश हरकत में आए और मंत्री और अफसर को बुलाया. अफसर ने पूरी बताई. कहा जाता है कि इस दौरान मुख्यमंत्री ने मंत्री की जमकर क्लास लगा दी थी. इस तरह से मंत्री मदन सहनी बिना अपनी बात मनवाये ही वापस काम पर लौटे. इस तरह से मंत्री मदन सहनी अफसरों के ट्रांसफऱ वाली फाईल निकलवाने में विफल रहे थे.