बिहार के एक लंगड़ीमार नेता जी को बधाई वाला विज्ञापन देकर खुश करने में जुटे टिकटार्थी, डर है कि कहीं उल्टा दांव न लगा दें...

बिहार के एक लंगड़ीमार नेता जी को बधाई वाला विज्ञापन देकर खुश करने में जुटे टिकटार्थी, डर है कि कहीं उल्टा दांव न लगा दें...

पटनाः बिहार में विधान सभा के चुनाव होने हैं। इस चुनावी मौसम में हर राजनीतिक कार्यकर्ता की इच्छा चुनाव लड़ने की होती है। इसी का फायदा बड़े नेता उठाते हैं.टिकट का प्रलोभन देकर छोटे कार्यकर्ताओं से हर वो नाजायज काम करवाते हैं जिसमें नेता जी का स्वार्थ होता है।आखिर छोटे स्तर के कार्यकर्ता करें भी तो क्या...मजबूरी ऐसी कि न चाहते हुए भी करना पड़ता है।इस आस में कि नेताजी आगे कहीं काम आयेंगे और टिकट मिलने की स्थिति में लंगड़ी नहीं फंसायेंगे।

पैर खीचेंने की कला में निपुण हैं नेताजी 

आज हम चर्चा कर रहे हैं बिहार के सत्ताधारी दल के एक माननीय की. नेता जी काफी पुराने और धुरंधर माने जाते हैं।उन्हें बालू से भी तेल निकालने की महारथ हासिल है। नेताओं की पैर खींचने की कला में माननीय का कोई जोड़ नहीं..संसदीय क्षेत्र के नेता-कार्यकर्ता पैर खींचने वाली उनकी कला से हमेशा भयभीत रहते हैं। लिहाजा नेता जी जैसा कहते हैं वैसा करने में ही अपनी भलाई समझते हैं।चाहे पॉकेट इसके लिए इजाजत दे अथवा नहीं लेकिन अगर नेता जी का संदेशा आ गया तो करना ही पड़ता है।

सिपहसलार बना रहे हवा

बिहार में अभी टिकट को लेकर टिकटार्थी नेताओं के चक्कर लगा रहे। इस चुनावी मौसम में बिहार के एक माननीय का जन्मदिन पड़ गया।इस बार उनके जन्मदिन पर अखबार से लेकर सड़कों पर पोस्टर लगाकर बधाई और शुभकामनाएं दी जा रही।टिकटार्थियों में नेता जी के जन्मदिन पर अखबारों में विज्ञापन देकर मुबारकबाद देने की होड़ मची है।यह होड़ यूं ही नहीं है बल्कि इसके पीछे वह भय है जिसके लिए वो जाने जाते हैं।दरअसल नेता जी के सिपहसलारों ने मैसेज करवा दिया कि नेता जी का जन्मदिन है।लिहाजा चौक-चौराहों पर होर्डिंग्स लगनी चाहिए।यह खबर उन तक पहुंचाई गई जो उस जिले के किसी भी विधान सभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार हैं. नेता जी के सिपहसलारों ने हवा बनाया कि जब तक माननीय की मुहर नहीं लगेगी तब तक कोई भी सहयोगी दल से टिकट की आस पूरी नहीं होगी। बस क्या था टिकट की आस में टकटकी लगाए कार्यकर्ता अखबारों में विज्ञापन देकर वहां तक मैसेज पहुंचाने की कोशिश में जुट गए कि हम ही आपके शुभचिंतक हैं और आप हमारे माई-बाप हैं.

इस बार जीत कर भी हार गए हैं माननीय

अब हम आपको बताते हैं कि आखिर ये नेता जी हैं कौन जिनके लिए अखबारों में पैसे खर्च कर विज्ञापन दिए जा रहे हैं.दरअसल माननीय एक बड़ी पार्टी से जुड़े हैं और बड़े पद पर भी रह चुके हैं,लेकिन इस बार अपनी करनी की वजह से गच्चा खा गए.हालांकि नेता जी के गच्चा खाने की वजह से उनके क्षेत्र के मुट्ठी भर कार्यकर्ताओं को छोड़ बाकी सब लोग खुश ही दिखते हैं,क्यों कि आम लोग पिछली बार की करनी देख चुके हैं.


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