BIHAR NEWS: पूरे देश से अलग है बिहार के इस गांव की परंपरा, यहां शरद पूर्णिमा पर होता है रावण दहन, मेघनाथ भी नहीं रहते साथ

BIHAR NEWS: पूरे देश से अलग है बिहार के इस गांव की परंपरा, यहां शरद पूर्णिमा पर होता है रावण दहन, मेघनाथ भी नहीं रहते साथ

BUXAR: शारदीय नवरात्र का समापन के साथ ही आज मां की विदाई हो जाएगी। इसके साथ ही आज देशभर के कई शहरों में रावण दहन का कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। वैसे तो सभी जगहों पर आज शाम और देर रात तक रावण दहन कर दिया जाएगा, मगर बिहार में एक ऐसा गांव भी है जहां आज रावण दहन नहीं किया जाता। आप भी आश्चर्य में पड़ गए होंगे कि यदि आज नहीं तो कब? तो इसका जवाब भी आपको इसी खबर में मिलेगा-

खबर है बक्सर के कुकुढ़ा गांव की, जहां अलग ही अंदाज में दुर्गापूजा और रावण दहन का आयोजन किया जाता है। यहां दशहरा के 5वें दिन रावण दहन किया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि यहां श्रीराम के वन गमन की तिथि से रामलीला शुरू की जाती है। मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन ही रावण के पुतले का दहन किया जाए। कुकुढा में इस साल भी शरद पूर्णिमा पर रावण वध की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। गांव के निवासी ने बताया कि यहां नवरात्रि की पहली तिथि से रामलीला का शुभारंभ होता है। यहां की रामलीला की प्रस्तुति भी निराली है। देश भर में जहां रामलीला का प्रदर्शन भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव से होता है। वहीं, यहां पहली नवरात्र को रामलीला का शुभारंभ श्रीराम के वन-गमन के दृश्य की प्रस्तुति व प्रसंग के साथ होता है। 

एक और खास बात यह है कि कुकुढ़ा गांव में रावण के साथ यहां मेघनाथ नहीं जलाया जाता है। बल्कि, यह एक दिन पहले ही इसके पुतले का दहन किया जाता है। क्षेत्र के ग्रामीण बताते हैं कि पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले इस रावण वध कार्यक्रम को देखने के लिए बहुत दूर-दूर से काफी संख्या में ग्रामीण यहां जुटते हैं। आयोजकों ने बताया कि रावण वध कार्यक्रम के लिए यहां व्यापक प्रबंध किए जाते हैं। ग्रामीणों द्वारा बताया गया कि आज भी वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया जाता है। हर जगह दशहरा पर मेले का आयोजन कर रावण वध हो जाने के कारण कुकुढा में शरद पूर्णिमा को मेले के आयोजन व रावण वध देखने के लिए दूर दराज से भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है।

गांव की रामलीला राम की शिक्षा से प्रारम्भ होती है, जिसमे पहले दिन की रामलीला पंचायत भवन में होती है। इसके बाद कुकुढा मिडिल स्कूल में चार दिन केवट प्रसंग, हिरण वध, सीताहरण का मंचन होता है। इसके बाद हनुमान मंदिर, जो पंपापुर के नाम से प्रसिद्ध है, वहां बाली वध दिखाया जाता है। इसके बाद की लीला असकामनी मैदान पर की जाती है, जहां पूर्णिमा को रावण वध के बाद पुतले का दहन कर दिया जाता है।

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