कोरोना के बाद बिहार में ठंड का बढ़ता प्रकोप, पड़ेगी कड़ाके की ठंड

कोरोना के बाद बिहार में ठंड का बढ़ता प्रकोप, पड़ेगी कड़ाके की ठंड

पटना: बिहार में इस बार कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार हैं. ला नीना के प्रभाव से दिसंबर मध्य से लेकर जनवरी मध्य तक कॉड वेब की स्थिति बार बार बन सकती है. मौसमविदों का कहना है कि इस बार बिहार में मानसून की स्थिति काफी बेहतर थी जिसको लेकर ये अंदाजा लगाया जा सकता है की ठंड भी काफी जोड़ दार पड़ेगी. 

अब मानसून राज्य से विदा ले चूका है. इसकी के साथ पछुवा हवा के साथ ठंड ने दस्तक ले ली है. इस साल सूबे में सबसे ज्यादा दिनों तक पुरवा प्रभावी रहने के कारन काफी दिनों तक वातावरण में नमी की मात्र बनी रही. जिस वजह से ठंड के आगमन में इस बार देरी हुई है. सूबे में ठंड का कहर फ़रवरी महीने तक रहने का पूर्वानुमान है. अभी से ही यह दिखने लगा है. न्यूनतम पारा सामान्य से तीन डिग्री तक निचे आ गया है. इस वजह से राह में ठंड की अनुभूति होने लगी है.

 


बिहार में ठंड का प्रकोप भले ही देरी से अनुभव हुआ लेकिन इसका कहर काफी ज्यादा होने वाला है. दिनों में आसमान साफ़ रहने की वजह से अभी अधिकतम तापमान सामान्य है लेकिन जैसे ही पश्च्मि वोक्षोव के प्रभाव शुरू होंगे दिन के तापमान में भी काफी गिरावट आएगी. रात में आसमान के साफ़ होने की वजह से पृथ्वी की ऊष्मा का उत्सर्जन हो रहा है. इसी वजह से न्यूनतम पारे में गिरावट भी आने लगा है. 

क्या है ला नीना

ला नीना एल नीनो से ठीक विपरीत प्रभाव रखती है। पश्चिमी प्रशांत महासागर में एल नीनो द्वारा पैदा किए गये सूखे की स्थिति को ला नीना बदल देती है, तथा आर्द्र मौसम को जन्म देती है।ला नीना के आविर्भाव के साथ पश्चिमी प्रशांत महासागर के ऊष्ण कटिबंधीय भाग में तापमान में वृद्धि होने से वाष्पीकरण अधिक होने से इण्डोनेशिया एवं समीपवर्ती भागों में सामान्य से अधिक वर्षा होती है। ला नीना परिघटना कई बार दुनिया भर में बाढ़ की सामान्य वजह बन जाती है।

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