तिब्बत की आजादी के लिए बोधगया में उठी मांग, तिब्बती यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बोले-शी जिनपिंग के तानाशाही से सांस्कृतिक पहचान को संकट

तिब्बत की आजादी के लिए बोधगया में उठी मांग, तिब्बती यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष बोले-शी जिनपिंग के तानाशाही से सांस्कृतिक पहचान को संकट

GAYA : तिब्बत की आजादी के लिए सोमवार को बोधगया स्थित सिक्किम टेंपल गेस्ट हाउस में तिब्बती युवक कांग्रेस मेन पार्ट सरगुजा की ओर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मौजूद तिब्बती यूथ कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ट्रासी वांग्गु ने कहा कि शी जिनपिंग के तानाशाही से विशिष्ट तिब्बती सांस्कृतिक पहचान को संकट उत्पन्न हो गया है। 

उन्होंने कहा की चीन की कठोर नीतियों के बलपूर्वक कार्यान्वयन के माध्यम से अभूतपूर्व हमले हो रहे हैं। तिब्बत के मूल आबादी पर चीन द्वारा बसाया गया आबादी है। हम अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तिब्बत की आवाज बुलंद करने और तिब्बत के अंदर महत्वपूर्ण मानवाधिकारों की स्थिति को संबोधित करने का आग्रह कर रहे हैं। 

उन्होंने कहा कि हाल ही में तिब्बतियों के सहमति के बिना भिक्षुओं की बलपूर्वक बेदखली, मठों के विध्वंस और तिब्बती संचालित स्कूलों को बंद किया गया है। मठ वासी संस्थानों और स्कूलों में उच्च तकनीकी उपकरण स्थापित किए गए हैं। तिब्बत की आजादी का अर्थ भारत की पूर्ण सुरक्षा है। इस बात पर भारत सरकार को ध्यान देनी चाहिए। खासकर देश के मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस बात की उम्मीद है कि उनके मजबूत नेतृत्व में तिब्बत की आजादी की बात अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखी जाएगी। 

उन्होंने कहा की हम लगातार भारत सरकार से पत्राचार कर रहे हैं। हम तिब्बती ही नहीं चीनी जनमानस वहां के राष्ट्रपति की दमनकारी नीति के शिकार हैं। उनके कब्जा करने की नीति का हम घोर विरोध करते हैं और भारत सरकार से हमें काफी उम्मीद है कि मानव अधिकारों की रक्षा के लिए हमारी आवाज को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखें।

गया से संतोष कुमार की रिपोर्ट 

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