शिक्षा मंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने याद कराई पुरानी बातें! एक ने कहा- क्या आपको याद है? दूसरे ने दिया जवाब...'शायद आप भूल गये'

शिक्षा मंत्री और नेता प्रतिपक्ष ने याद कराई पुरानी बातें! एक ने कहा- क्या आपको याद है? दूसरे ने दिया जवाब...'शायद आप भूल गये'

पटना. बिहार के शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर और विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा के बीच ट्विटर पर वाक युद्ध छिड़ गया। इस दौरान दोनों ने एक दूसरे पर कटाक्ष किया। दरअसल, विजय सिन्हा ने बिहार की शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों को लेकर बिहार के शिक्षामं त्री पर तीखा सवाल किया था। इस पर शिक्षा मंत्री ने ट्विटर पर जवाब देते हुए बीजेपी नेता सम्राट चौधरी के बयान को कोट करते हुए कहा 'बहुत व्याकुल नहीं होना है...।' इस पर नेता प्रतिपक्ष विजय सिन्हा ने भी ट्विटर पर शिक्षा मंत्री को याद दिलाया कि शायद आप भूल गये हैं, सम्राट चौधरी ने सदन में ही खेद व्यक्त कर चुके हैं।

बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर ने ट्वीट करते हुए कहा, 'विधानसभा के नेताप्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा जी, आपको आपके दल के ही नेता- वर्तमान में विधानपरिषद के नेताप्रतिपक्ष ने एक वाक्य कही थी। क्या आपको याद है? “बहुत व्याकुल नहीं होना है..."।

इस पर बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने ट्वीट करते हुए कहा, शिक्षा मंत्री प्रो. चंद्रशेखर जी शायद आप भूल गए! सम्राट चौधरी जी ने अपने मानवीय भूल के लिए सदन में ही खेद व्यक्त कर संवैधानिक पद की गरिमा बचा ली थी। क्या आप शिक्षकों का अपमान करने और शिक्षा व्यवस्था को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने के लिए सदन में क्षमा मांगेंगे?'

नेतागिरी कर रहे हैं शिक्षा मंत्री'

दरअसल शुक्रवार को शिक्षा मंत्री के साथ शिक्षक संगठनों की बैठक पर विजय सिन्हा ने कहा कि शिक्षा मंत्री ने शिक्षक संगठनों के नेताओं से उपेक्षापूर्ण व्यवहार किया। नियोजित शिक्षकों की सभी मांगे जायज है। राज्यकर्मी का दर्जा, पुराने शिक्षकों की तरह वेतमान, बकाया राशि का भुगतान सहित प्रोन्नति एवं सेवा शर्तों के लिए शिक्षक संघर्षरत है।

विजय सिन्हा ने कहा कि शिक्षामंत्री खुद शिक्षक है, लेकिन उन्हें शिक्षकों से कोई सहानुभूति नहीं है। शिक्षा मंत्री यह नहीं समझते हैं कि इन शिक्षकों के भी बाल बच्चे और परिवार हैं, जिनके भरण-पोषण के लिए उन्हें समय पर वेतन भुगतान होने चाहिए। पर दुर्भाग्यवश इन्हें 20-20 महीनों तक वेतन नहीं मिलता है। सरकार शिक्षा एवं शिक्षकों के प्रति कितना असंवेदनशील है, इसका आभास इसी से होता है कि दिसंबर में आगामी विधानसभा सत्र में शिक्षा विभाग से संबंधित प्रश्न नहीं पूछे जाएं। सरकार ने जान बूझ कर विधान सभा सत्र का ऐसा कार्यक्रम बनाया कि शिक्षा विभाग से संबंधित प्रश्न सदन में न पूछे जाएं।


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