मूवी रिव्यू: भारत के पहले 'गोल्ड' की कहानी, जब भारत ने मनाया 'Golden' डे

मूवी रिव्यू: भारत के पहले 'गोल्ड' की कहानी, जब भारत ने मनाया 'Golden' डे

N4N DESK:15 अगस्त के मौके पर बड़े पर्दे पर भी जश्न मन रहा है. अक्षय कुमार की मूवी गोल्ड रिलीज हुई है. भारत के आज़ादी के बाद ये पहला गोल्ड था जो भारत के खाते में आया था. अक्षय कुमार ने इस ऐतिहासिक रोल को बखूबी निखारा है.


'गोल्ड' जोश से भरे इस टीम के सफर को दिखाती है जिसने ब्रिटेन के 200 सालों की गुलामी के आगे अपना झंडा बुलंद किया। फिल्म की कहानी 1936 से शुरू होती है जब भारतीय हॉकी टीम ने बर्लिन ओलिंपिक्स में लगातार तीसरी बार गोल्ड जीता था। तब यह टीम ब्रिटिश इंडिया टीम कहलाती थी जिसमे खिलाड़ी ज्यादा भारत के होते थे लेकिन ख़िताब ब्रिटिश को जाता था. टीम के एक बंगाली जूनियर मैनेजर ने आजाद भारत की टीम को गोल्ड दिलाने का संकल्प लिया। उसका सपना 1948 में ब्रिटेन की धरती पर भारतीय ध्वज लहराने का था। 

यह फिल्म हमें इतिहास के उस दौर में ले जाती है जिसके बारे में कम ही बात होती है। सभी कलाकारों का प्रदर्शन शानदार है। अक्षय कुमार का लुक आउट अभिनय काबिले तारीफ है. कुणाल कपूर ने पहले हॉकी प्लेयर और फिर हॉकी टीम के कोच के रूप में शानदार प्रदर्शन किया है। विनीत कुमार का काम भी दमदार है। अमित साध का किरदार भी काफी अच्छा है जो टीम के उपकप्तान रहते हुए जिंदगी के पाठ सीखते हैं। एक गुस्सैल प्लेयर के रूप में सनी कौशल ने भी अपना किरदार बखूबी निभाया है। मॉनी राय ने भी अच्छा अभिनय किया है.

यह विभाजन की दर्दनाक घटना को भी दर्शाती है जिसने बड़ी क्रूरता के साथ देश को दो भागों में बांट दिया। प्रॉडक्शन डिजाइन और कॉस्ट्यूम ने उस दौर को रीक्रिएट करने में अहम भूमिका निभाई है। सिनेमटॉग्रफी और बैकग्राउंड स्कोर तकनीक और गुणवत्ता के मामले में काफी कमाल के हैं। फिल्म में होने वाले हॉकी मैच थ्रिल बनाए रहते हैं। मैच का अंत जानते हुए भी आप पूरे मैच के दौरान रोमांच महसूस करेंगे और भारतीय टीम के लिए चीयर करेंगे। 

कहानी में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा और सपने को पूरा करने की संघर्ष देखने को मिला है. बाकि की कहानी देखने के लिए आपको मूवी देखना होगा 

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