राज्यसभा में विपक्ष ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को लेकर सरकार पर बोला हमला

राज्यसभा में विपक्ष ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को लेकर सरकार पर बोला हमला

DESK. राज्यसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि के कारण आम आदमी को हो रही परेशानियों को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार अनाज उत्पादन बढ़ने के बावजूद किसान अच्छे दाम पाने को तरस रहे हैं वहीं उपभोक्ता महंगी कीमतों के कारण पिस रहे हैं। आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते मूल्य पर उच्च सदन में अल्पकालिक चर्चा की शुरूआत करते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) सदस्य इलामारम करीम ने पिछले कुछ समय से गेहूं, दालों और खाद्य तेलों की बढ़ती कीमतों पर चिंता जतायी। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों की रसोई पर विपरीत प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि सब्जियों की आपूर्ति के मामले में नीतिगत पंगुता दिखाई देती है।

भाकपा सदस्य ने कहा कि देश में खाद्यान्न उत्पादन में लगातार वृद्धि के बावजूद किसान अच्छे दाम पाने के लिए तरस रहे हैं जबकि आम उपभोक्ता मूल्यवृद्धि के कारण पिस रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को सार्वजनिक वितरण प्रणाली का दायरा बढ़ाना चाहिए और इससे मूल्यवृद्धि पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के मूल्यों की वृद्धि को देखते हुए इस साल के शुरू में इसके निर्यात पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे खरीद पर प्रतिकूल असर पड़ा और कम खरीद हुई। उन्होंने कहा कि अब जबकि गेहूं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं तो इसके निर्यात पर रोक लगा दी गयी है। मारम ने कहा कि सरकार को अत्यधिक धनी लोगों पर ऊंचा कर लगाना चाहिए और आम आदमी पर करों का बोझ नहीं बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने यह गलत दावा किया कि जीएसटी परिषद की बैठक में आवश्यक वस्तुओं पर पांच प्रतिशत जीएसटी लगाने का फैसला सभी राज्यों की सम्मति से लिया गया। उन्होंने कहा कि केरल एवं अन्य कई राज्यों ने इसको अपना समर्थन नहीं दिया था और वित्त मंत्री को अपना यह बयान वापस लेना चाहिए।


तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि टूथपेस्ट और मूड़़ी से लेकर चैक बुक जैसी आवश्यक वस्तुओं पर जीएसटी लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि आज केंद्र जो उपकर और अधिभार के माध्यम से धन वसूल रहा है उसका दो तिहाई केंद्र सरकार को ही मिल रहा है। उन्होंने वित्त मंत्री से सवाल किया कि जब अमेरिका में मुद्रास्फीति दर नौ प्रतिशत और भारत में सात प्रतिशत है तो डॉलर के मुकाबले रूपया मजबूत होने के बजाय कमजोर क्यों हो रहा है? डेरेक ने कहा कि उच्चतम न्यायालय यह कह चुका है कि जीएसटी परिषद एक परामर्श निकाय मात्र है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के मामले में केंद्र अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता। 

कांग्रेस के शक्ति सिंह गोहिल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सच को परेशान करने या जेल में डालने से ‘‘ न तो रावण का शासन रहा था, न कंस का शासन रहा था और न ही आपका रहेगा।' उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शब्द गढ़ने में माहिर हैं और उन्होंने शब्द गढ़ा..टॉप यानी टमाटर, प्याज एवं आलू। उन्होंने कहा कि ये तीनों आम आदमी के घर की आवश्यकता हैं और आज सरकार ने इन टॉप के दामों को टॉप (शीर्ष) पर पहुंचा दिया है। कांग्रेस सदस्य ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से कहा कि वह गुजरात में जहरीली शराब के पीड़ितों के घर उनके साथ चलें और उन लोगों से पूछें कि गरीबी है या नहीं। उन्होंने कहा कि आम आदमी यह उम्मीद कर रहा था कि संसद सत्र से पहले उसे महंगाई से कुछ राहत मिलेगी किंतु उसे जीएसटी की मार झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जीएसटी के मामले में श्मशान को भी नहीं छोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी एक समय कहा करते थे कि जब रूपया गिरता है तो देश का सम्मान गिरता है। उन्होंने कहा कि आज उन्हें बताना चाहिए कि जब रूपया इतना गिर गया है तो क्या देश का सम्मान नहीं गिरा है? 

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि सरकार एक ओर एक किलोग्राम चावल तीस रूपये की दर से खरीदती है और उसे राज्यों को तीन रूपये प्रति किलोग्राम देती है। उन्होंने कहा कि ऐसे में यदि सरकार कर नहीं लगायेगी तो उसके पास इनके लिए धन कहां से आएगा। जावड़ेकर ने कहा कि जहां भाजपा शासित सरकारों ने पेट्रोल एवं डीजल पर मूल्य वर्धित कर को कम किया वहीं अन्य दलों के शासन वाले राज्यों में इस पर वैट कम नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में इससे पहले जो सरकार थी उसने पेट्रोल एवं डीजल पर वैट तो कम नहीं किया किंतु शराब पर आबकारी कर घटा दिया था।


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