हाथरस कांड को लेकर अब जदयू ने खोला योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा, राष्ट्रीय महासचिव ने कह दी बड़ी बात

हाथरस कांड को लेकर अब जदयू ने खोला योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा, राष्ट्रीय महासचिव ने कह दी बड़ी बात

Desk : यूपी के हाथरस कांड पर अब राजनीति तेज होती दिख रही है। कांग्रेस समेत सभी विपक्ष के बाद अब बिहार विधानसभा चुनाव के बीच बीजेपी के सबसे बड़े सहयोगी जदयू ने भी इस मामले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।  जदयू ने इस मामले में प्रधानमंत्री के हस्तक्षेप को योगी सरकार के लिए शर्मनाक बताया। जदयू ने योगी सरकार से सवाल किया है कि क्या देश में दलितों-वंचितों के साथ दुष्कर्म के मामले में न्याय के लिए प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना होगा?

जदयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा है कि हाथरस की घटना ने निर्भया कांड को शर्मशार कर दिया। पीड़िता को गंभीर स्थिति के बावजूद एम्स में भर्ती नहीं कराया गया। पीड़िता के मरने के बाद परिवार के लोग उसका अंतिम दर्शन नहीं कर सके। अंतिम क्रिया से पहले की परंपरा नहीं निभाने दी। परिजनों को मुखाग्नि नहीं देने दी। पुलिस वाले अंतिम संस्कार के दौरान हंसी-ठिठोली करते दिखे।  त्यागी ने कहा, दुष्कर्म नहीं होने और पीड़िता को प्रताड़ित न करने जैसे दावे किए गए। यह कौन से हिंदू संस्कृति है कि रात में परिवार वालों की मर्जी के खिलाफ और उनकी अनुपस्थिति में दाह संस्कार कर दिया जाए। इतनी क्रूरता तो निर्भया मामले में भी पुलिस-प्रशासन ने नहीं बरती। हाथरस पुलिस-प्रशासन के एक-एक व्यक्ति को निलंबित किया जाना चाहिए।


जदयू महासचिव केसी त्यागी ने कहा, दलितों-वंचितों की रक्षा किसी सरकार का पहला दायित्व है। हाथरस में जो हुआ वह उत्तर प्रदेश सरकार के लिए शर्मनाक है। एक दलित युवती को न्याय दिलाने के लिए अगर प्रधानमंत्री को हस्तक्षेप करना पड़े तो इससे बड़ी शर्म की बात किसी राज्य सरकार के लिए क्या होगी?  यह यूपी सरकार के लिए डूब मरने जैसी बात है। क्या इस देश में दलितों और वंचितों को न्याय बिना दिल्ली के हस्तक्षेप के संभव नहीं है?

जदयू का इस मुद्दे पर अपने ही सहयोगी के खिलाफ मोर्चा खोलने के कारण है। दरअसल बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष हाथरस कांड को बड़ा मुद्दा बनाने की तैयारी में है। कांग्रेस के निशान पर जहां बीजेपी है वहीं राजद के निशाने पर जदयू है। बुधवार को राजद नेता तेजस्वी यादव ने भाजपा के साथ जदयू पर निशाना साधा था। बिहार में करीब 16 फीसदी मतदाता दलित हैं। ऐसे में जदयू को इससे सियासी घाटे का डर सता रहा है।


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