75 के हुए लालू प्रसाद : आसान नहीं होता है सदियों से सहने, दबे और हाशिए पर रहने को अपनी नियति मान चुके वंचितों को जगाना, उन्हें समान होने का विश्वास दिलाना!

75 के हुए लालू प्रसाद : आसान नहीं होता है सदियों से सहने, दबे और हाशिए पर रहने को अपनी नियति मान चुके वंचितों को जगाना, उन्हें समान होने का विश्वास दिलाना!

PATNA : आसान नहीं होता है सदियों से सहने, दबे और हाशिए पर रहने को अपनी नियति मान चुके वंचितों को जगाना, उन्हें समान होने का विश्वास दिलाना! यह वह मैसेज है जो राजद की तरफ से पार्टी के संस्थापक लालू प्रसाद को उनके 75वें जन्मदिन के अवसर पर ट्विटर पर पोस्ट किया गया है। 

मैसेज में लिखी गई बातें साफ बताती है कि कैसे लालू प्रसाद ने अपने राजनीतिक सफर में उन दबे कुचले लोगों, जो कि खुद हाशिए पर रहने को अपनी नियति मान चुके थे, उन्हें समाज में समान होने का विश्वास दिलाया। आज भी यह सफर जारी है।

लालू प्रसाद आज अपना 75 वां जन्मदिन मना रहे हैं। करीब 5 साल बाद अपने समर्थकों के बीच आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद अपना 75 वां जन्मदिन (Lalu Prasad 75th Birthday) मना रहे हैं. उनके बर्थडे पर पार्टी की तरफ से व्यापक स्तर पर आयोजन किया जा रहा है. लालू प्रसाद के जन्मदिन को लेकर पार्टी में कितना उत्साह है, इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरे प्रदेश कार्यालय को हरे रंग की रोशनी में रंग दिया गया है. पार्टी ऑफिस को दुल्हन की तरह सजाया गया है. राजधानी पटना में राजद कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे पोस्टर भी लगाए हैं. राजद कार्यालय के सामने भी कई तरह के पोस्टर कार्यकर्ताओं द्वारा लगाया गया है

11 जून 1948 को बिहार के गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में जन्मे लालू प्रसाद ने अपनी जिंदगी के पांच दशक के करीब राजनीतिक सफर में लालू प्रसाद ने उन कामयाबी और नाकामयाबी के तमाम दौर देखे। कभी जेपी आंदोलन में जेल गए। कम उम्र में सांसद बने। फिर बिहार की गद्दी पर भी बैठने का मौका मिला। केंद्र में मंत्री बने। एक सफल पार्टी के संस्थापक बने। आज भी लालू प्रसाद राजनीति के ब्रैंड माने जाते हैं। जिनके इर्द-गिर्द बिहार की राजनीति चलती है।

गरीबों का नेता

लालू प्रसाद को गरीबों का नेता माना जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए बिहार में दलितों, पिछड़ों और समाज के वंचित तबकों को आगे बढ़ाने का काम किया। उन्होंने ऐसे वर्ग के लिए कई काम किए। उनके शिक्षा से लेकर उनके लिए घर बनाने तक। ऐसे ही कार्य के कारण वह गरीबों के मसीहा बन गए

चारा घोटाला का दाग आज नहीं मिटा

1995 में बतौर मुख्यमंत्री रहते हुए लालू प्रसाद पर पशुपालन विभाग में 950 करोड़ रुपए का चारा घोटाला का आरोप लगा। यह वह घोटाला था, जिसने लालू प्रसाद की पूरी जिंदगी बदल दी। पहले मुख्यमंत्री का पद गंवाया। फिर कई बार जेल भी जाना पड़ा। अब भी इस घोटाले की जांच पूरी नहीं हुई है और लालू प्रसाद 28 साल बाद भी इस घोटाले के दाग को मिटा नहीं सके हैं। इस घोटाले के कारण लालू प्रसाद की छवि एक भ्रष्ट नेता की बन गई।


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