मां काली के साधक 'प्रेम बाबा' के लीला की कहानी जानिए... बड़े-बड़े नेता लगाते हैं इनके दरबार में हाजिरी

मां काली के साधक 'प्रेम बाबा' के लीला की कहानी जानिए... बड़े-बड़े नेता लगाते हैं इनके दरबार में हाजिरी

पटना :  मां काली की साधना करने वाले तांत्रिक और उनके कारनामे की कहानी तो आप लोगों ने बहुत सुनी होगी लेकिन आज हम बताने जा रहे हैं एक ऐसे तांत्रिक के बारे में जिनके दरबार में हाजिरी लगाने के लिए दर्जनों राजनेता से लेकर उद्योगपति तक पहुंचते हैं और उनकी मुराद भी पूरी होती है। जी हां हम बात कर रहे हैं पटना सिटी के  बालकिशुन गंज स्थित कबूतर गली के रहने वाले प्रेम प्रकाश मिश्रा उर्फ प्रेम बाबा की जिन्होंने श्मशान घाट पर सिद्धि प्राप्त करने के बाद चर्चित नेताओं से लेकर उद्योगपति और अनगिनत दुखी पीड़ित लोगों को नई जिंदगी प्रदान की है। प्रेम बाबा के दरबार में हिंदू मुसलमान ,सिख, ईसाई सभी धर्मों के लोग आते हैं और शीश झुकाते हैं। तो आइए आज जानते हैं तांत्रिक प्रेम बाबा के चमत्कार की कहानी...

राजनेता भी लगाते हैं बाबा के दरबार में हाजिरी...

सबसे पहले प्रेम बाबा कि उस कहानी के बारे में हम बात करेंगे जिसे बहुत कम लोग जानते हैं। यह बात वर्ष 2002 की है जब अटल बिहारी वाजपेई कैबिनेट में डॉ सीपी ठाकुर शामिल थे और उन्हें निकाल दिया गया था। बाजपेई मंत्रिमंडल से निकाले जाने के बाद डॉक्टर सीपी ठाकुर हताश होकर अपने घर पहुंचे और अपने समर्थकों के साथ बैठकर आगे की रणनीति तैयार कर रहे थे ।तभी नौबतपुर के रहने वाले उनके एक समर्थकों ने दबी जुबान से कहा कि पटना सिटी की कबूतर गली स्थित एक शक्ति साधना स्थली है जहां प्रेम बाबा रहते हैं वहां एक बार चलिए क्योंकि उनके दरबार से अब तक कोई खाली नहीं लौटा है ।अपने समर्थक द्वारा पूर्ण विश्वास के साथ बाबा के बारे में कहने के बाद डॉ सीपी ठाकुर भी सोच में पड़ गए और समर्थक की बात मानकर एक बार बाबा के दरबार में जाने का फैसला किया ।फिर क्या था समर्थकों के साथ सीपी ठाकुर बाबा के दरबार में पहुंचे जहां पहले से ही प्रेम बाबा अपनी धूनी रमाई हुए थे। जैसे ही सीपी ठाकुर ने प्रेम बाबा का चरण स्पर्श किया बाबा ने कहा कि सेवक आप की अभिलाषा जल्द ही पूरी होगी 3 - 4 हफ्ता के अंदर खुद अटल बिहारी वाजपेई आपको बुलाएंगे और अपने मंत्रिमंडल में शामिल करेंगे ।लेकिन इसके लिए हमें कुछ अनुष्ठान करना पड़ेगा। प्रेम बाबा के द्वारा इस तरह की बात कहे जाने के बाद डॉ सीपी ठाकुर राजी हो गए और बाबा को अनुष्ठान करने की बात कही साथ ही उन्होंने कहा कि जो खर्चा होगा वह हम देंगे। डॉ सीपी ठाकुर के कहने पर प्रेम बाबा ने मां काली के कमरों में पांच कलश स्थापित किए और 21 दिनों तक अनुष्ठान किया अनुष्ठान समाप्त होने के बाद डॉ सीपी ठाकुर ने प्रसाद ग्रहण किए और उनके द्वारा दिए गए चावल अक्षत को लेकर अपने घर पहुंचे और घर के कोने कोने में छिड़काव किया। उसी दिन रात को जब वह खाना खाने के लिए बैठे थे तभी उनके लैंडलाइन फोन पर घंटी बजी और फोन पर खुद अटल बिहारी वाजपेई मौजूद थे उन्होंने कम शब्दों में या कहा कि कल आप मेरे कार्यालय में आकर मिलिए फिर क्या था पहली फुर्सत में ही सीपी ठाकुर दिल्ली पहुंचे और कल प्रधानमंत्री वाजपेई से मुलाकात की जहां उन्हें फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया गया। उस दिन से अब तक डॉ सीपी ठाकुर प्रेम बाबा के भक्त हैं और जब कभी उन्हें फुर्सत मिलती है तो वह उनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंच जाते हैं। इस बात को लेकर जब डॉ सीपी ठाकुर से बात की गई तो उन्होंने कहा कि आज साधारण तांत्रिक प्रेम बाबा के आशीर्वाद से ही हमारी जिंदगी में दोबारा खुशी मिली और अब तक चल रही है उनका बखान करना मुश्किल है ।वह बिल्कुल असाधारण दिखने वाले महान तांत्रिक हैं।डॉ सीपी ठाकुर ही नहीं और भी कई ऐसे राजनेता हैं जो उनके दरबार में हाजिरी लगाने आते हैं जिसमें केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे बाबूलाल मरांडी के साथ-साथ अन्य 50 राजनीतिक दिग्गज उनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं।

डॉक्टर बिजनेसमैन की आते हैं दरबार में...

राजनेता ही नहीं बिजनेसमैन और डॉक्टर भी उनके दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचते हैं। हम बात कर रहे हैं धनबाद के मशहूर डॉक्टर एसएन विश्वास की जिनकी दोनों किडनी फेल हो गई थी और वह देश विदेश के चर्चित डॉक्टरों से इलाज करा कर थक चुके थे सभी डॉक्टर जवाब दे चुके थे और वह अपनी जिंदगी जीने की आस छोड़ चुके थे। तब वह प्रेम बाबा के दरबार में पहुंचे और वहां अनुष्ठान किया अनुष्ठान के बाद महाकाली की प्रसाद ग्रहण किया जिसके बाद वह बिल्कुल स्वस्थ हो गए। अब तक प्रेम बाबा ने कई कैंसर पेशेंट को भी ठीक किया है। 

राज दरबार से भी आती है बाबा को बुलाहट...

डॉक्टर ही नहीं राज दरबार से भी उनकी भी बुलाहट होती है एक बार की बात है। जब उन्हें शिवहर राज दरबार में बुलाया गया जहां दरबार की रानी सरोज भी थी। प्रेम बाबा के साथ-साथ तंत्र विद्या में डिलीट की उपाधि हासिल करने वाले डॉ मेघा व्रत शर्मा भी वहां मौजूद थे ।इन सभी की मौजूदगी में प्रेम बाबा ने तंत्र साधना शुरू किया तो दूसरी तरफ पटना के कबूतर गली स्थित उनके आश्रम में उनके मां पिता सोए हुए थे और मूसलाधार बारिश हो रही थी जिस कमरे में प्रेम बाबा के मां बाप सोए थे उसमें लाइट नहीं था सिर्फ होल्डर ही था ।मगर अचानक 2 बजे रात को पूरा कमरा बगैर लाइट के ही चकाचौंध हो गया ।जब बाबा शिवहर स्टेट से पटना लौटे तो रुद्र प्रताप एवं राज किशोरी ने उन्हें इस घटना के बारे में बताया इस पर प्रेम बाबा ने मुस्कुराते हुए कहा कि वहां  जो साधना मैंने की थी उसी की शक्ति से मेरे तपोवन का कमरा जगमगा उठा था।

अपने जीवन की एक कहानी के बारे में बताते हुए प्रेम बाबा कहते हैं कि जब मैं बीएससी ऑनर्स का विद्यार्थी था और खर्चे के लिए पिताजी हर महीने मनीआर्डर भेजा करते थे ।लेकिन एक महीना ऐसा था जहां पिताजी के द्वारा भेजे गए मनीआर्डर नहीं पहुंच पाया और माता को भोग लगाना था ।घर में कोई सामग्री भी नहीं थी जब हमने अपना झोला देखा तो दो दाना चना दाल मिली इसी से मां काली की भोग लगाने की तैयारी कर रहा था ।इसी दौरान किसी ने दरवाजा खटखटाया और जब गेट खोल कर हमने देखा तो पड़ोस की रहने वाली एक महिला खड़ी थी जिसके हाथ में कई प्रकार के पकवान थे और उसी पकवान से हमने माता का भोग लगाया।

बताते चलें कि प्रेम बाबा का जन्म 25 नवंबर 1958 को तिलकुट की विश्व प्रसिद्ध नगरी गया के टेकारी पुलिस स्टेशन के वैद्ध बस्ती में हुई थी ।उनके पिताजी स्वर्ग रुद्र प्रताप मिश्रा राज्य विद्युत बोर्ड में लेखाकार थे वहीं उनकी माता राज किशोरी मिश्रा गृहिणी थी। प्रेम बाबा अपने मां-बाप के इकलौते संतान थे और टेकारी हाई स्कूल से मैट्रिक की परीक्षा पास करने के बाद टीपीएस कॉलेज से आईएससी और प्राणी शास्त्र में ऑनर्स की डिग्री हासिल की थी। प्रेम बाबा के पूर्वज मशहूर टेकारी स्टेट के राजतांत्रिक थे।उनके पुरखों की तंत्र साधना से अभिभूत होकर टेकारी महाराज ने उन्हें बतौर उपहार में 12 गांव की जिम्मेदारी दी थी ।अपने  खानदान की परंपरा को जीवित रखने के लिए प्रेम प्रकाश ने विज्ञान की पढ़ाई शुरू की लेकिन तंत्र मंत्र में खुद को लीन कर लिया ।अपने गुरु एवं नजदीकी रिश्तेदार चंद्रभूषण मिश्रा के मार्गदर्शन में प्रेम प्रकाश ने महाशक्ति की साधना तब शुरू की जब वह महज 18 साल के थे ।चंद्र भूषण ने बनारस ,कामरूप कामाख्या ,तारापीठ विंध्याचल ,महाकाली में दीक्षा संस्कार, वीर साधना की । तब कृष्ण पक्ष की अमावस के तीसरे पहर रात के 12 बजे से 3 बजे तक उन्होंने पटना के बांसघाट पर तंत्र साधना शुरू की ।उस समय काली की विशाल मूर्ति घाट पर थी।वो आगे चलकर महान तांत्रिक सिद्धार्थ नाथ बाबा बने ।

प्रेम प्रकाश मिश्रा उर्फ प्रेम बाबा की कहानी बड़ी रहस्यमई है उनकी पत्नी पूनम मिश्रा भी बैरागी है ।उनके जीवनकाल में ही उनकी अपार साधना से जुड़ी अनगिनत कहानी प्रचलित हो चुकी है ।फिलहाल प्रेम बाबा की साधना का मकसद सिर्फ और सिर्फ गरीब दुखियों ,पीड़ित ,निराश लोगों की मदद करना है । आज भी उनके दरबार में हाजिरी लगाने के लिए दर्जनों चर्चित लोग पहुंचते हैं और उनकी मनोकामना पूरी होती है। तंत्र विद्या में महारत हासिल करते ही प्रेम बाबा ने अपने जीवन लोगों के उद्धार में लगा दिया ।ऐसी कई कहानी है जिसे सुनने वाले दांतो तले उंगली दबा लेते हैं।बताते चलें कि महज 20- 21 साल में ही प्रेम प्रकाश प्रेम बाबा हो गए ।

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