मेट्रोमैन ई.श्रीधरन ने छोड़ी राजनीति, भाजपा को लगा झटका

मेट्रोमैन ई.श्रीधरन ने छोड़ी राजनीति, भाजपा को लगा झटका

तिरुवनंतपुरम. भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले मेट्रोमैन ई.श्रीधरन ने सक्रिय राजनीती को अलविदा कह दिया है. उन्होंने गुरुवार को अपने गृहराज्य केरल में इसकी घोषणा की. मलप्पुरम में अपने गृहनगर में मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि जब मैं कहता हूं कि मैं सक्रिय राजनीति छोड़ रहा हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि मैं राजनीति छोड़ रहा हूं. जब मैं चुनाव हार गया तो मुझे दुख हुआ, लेकिन अब मैं दुखी नहीं हूं क्योंकि एक विधायक के साथ कुछ नहीं किया जा सकता. बहुत से लोग नहीं जानते हैं, मैं अब 90 साल का हूं और जहां तक मेरी उम्र मानी जाती है, मैं उन्नत अवस्था में हूं. 

केरल में अपने संगठन को मजबूत करने के लिए भाजपा ने मेट्रोमैन ई.श्रीधरन को चुनाव में उतारा था. दिल्ली में मेट्रो का जाल बिछाने में ई.श्रीधरन की अहम भूमिका मानी जाती है. केरल से ई.श्रीधरन को चुनाव लड़ाने की भाजपा की रणनीति को तब उनकी लोकप्रियता को चुनाव में भुनाने से जोड़कर देखा गया था. श्रीधरन ने कहा, मैं राजनेता नहीं था क्योंकि मैं एक नौकरशाह हूं और भले ही मैं राजनीति में सक्रिय नहीं होने जा रहा हूं लेकिन हमेशा अन्य तरीकों से लोगों की सेवा कर सकता हूं. मेरे पास तीन ट्रस्ट हैं और मुझे इसमें काम करना है. उन्होंने कहा कि भाजपा की राज्य इकाई का वोट शेयर 16 से 17 फीसदी था, लेकिन अब इसमें कमी आई है.


पलक्कड़ विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने वाले श्रीधरन को तब भाजपा के एक धड़े की ओर से केरल के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में पेश किया गया था. हालाँकि उन्हें कांग्रेस विधायक शफी परम्बिल से 3,859 मतों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था. ऐसे में श्रीधरन का राजनीति छोड़ना भाजपा के लिए केरल में बड़ा झटका कहा जा सकता है. पार्टी वहां श्रीधरन के चेहरे को आगे कर अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में लगी थी लेकिन अब उनका राजनीति से ही अलग हो जाना आम लोगों में एक अलग किस्म का संदेश दे सकता है.


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