NATIONAL NEWS: प्रधानमंत्री का ‘मास्टरस्ट्रोक’, सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद को किया समर्पित

NATIONAL NEWS: प्रधानमंत्री का ‘मास्टरस्ट्रोक’, सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद को किया समर्पित

DESK: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को बड़ा औऱ ऐतिहासिक फैसला लिया है। एक तरफ जहां टोक्यो ओलंपिक ने देश की रग-रग में जोश और खेल भावना का संचार कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ देश के सर्वोच्च खेल रत्न पुरस्कार का नाम केंद्र सरकार ने बदलने का फैसला लिया है। इस संबंध में प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर बताया कि अब खेल रत्न पुरस्कार को ‘मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार’ के नाम से जाना जाएगा। 

प्रधानमंत्री ने ट्वीट के जरिए साझा की जानकारी

पीएम ने ट्विटर पर लिखा, 'ओलंपिक खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के शानदार प्रयासों से हम सभी अभिभूत हैं। विशेषकर हॉकी में हमारे बेटे-बेटियों ने जो इच्छाशक्ति दिखाई है, जीत के प्रति जो ललक दिखाई है, वो वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।' उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, 'देश को गर्वित कर देने वाले पलों के बीच अनेक देशवासियों का ये आग्रह भी सामने आया है कि खेल रत्न पुरस्कार का नाम मेजर ध्यानचंद जी को समर्पित किया जाए। लोगों की भावनाओं को देखते हुए, इसका नाम अब मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार किया जा रहा है। जय हिंद!'।

1991-92 में हुई थी इस पुरस्कार की शुरुआत
 
राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार भारतीय खेलों का सर्वोच्च पुरस्कार है। सरकार ने 1991-92 में इस पुरस्कार की शुरुआत की थी। इसे जीतने वाले खिलाड़ी को प्रशस्ति पत्र, अवॉर्ड और 25 लाख रुपए की राशि दी जाती है। सबसे पहला खेल रत्न पुरस्कार पहले भारतीय ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद को दिया गया था। अब तक 45 लोगों को ये अवॉर्ड दिया जा चुका है। हाल में क्रिकेटर रोहित शर्मा, पैरालंपियन हाई जम्पर मरियप्पन थंगवेलु, टेबल टेनिस प्लेयर मनिका बत्रा, रेसलर विनेश फोगाट को ये अवॉर्ड दिया गया है।

हॉकी प्लेयर्स को मिला खेल रत्न अवॉर्ड
 
हॉकी में अब तक 3 खिलाड़ियों को खेल रत्न अवॉर्ड मिला है। इसमें धनराज पिल्ले (1999/2000), सरदार सिंह (2017) और रानी रामपाल (2020) शामिल है। यहां विशेष रूप से हॉकी की बात इसलिए की जा रही है क्योंकि मेजर ध्यानचंद हॉकी के जादूगर के रूप में विश्व विख्यात हैं। हाल ही में भारतीय हॉकी टीम का टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन रहा है। इसी नजरिए से यहां इस खेल को वरीयता दी जा रही है। ध्यान रहे कि हमारा राष्ट्रीय खेल भी हॉकी ही है। 

हॉकी का जादूगर कहे जाते हैं ध्यानचंद
 
मेजर ध्यानचंद का जन्म 29 अगस्त 1905 को प्रयागराज में हुआ था। भारत में यह दिन राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है। उनकी आत्मकथा का नाम ‘गोल’ है। ध्यानचंद ने सिर्फ 16 साल की उम्र में भारतीय सेना जॉइन कर ली थी। ध्यानचंद ने 1926 से 1949 तक 185 इंटरनेशनल मैच में 400 गोल किए। उनके खेल की बदौलत ही भारत ने 1928, 1932 और 1936 के ओलिंपिक में गोल्ड मेडल जीता था। 1928 में एम्सटर्डम ओलिंपिक में उन्होंने सबसे ज्यादा 14 गोल किए। तब एक स्थानीय अखबार ने लिखा, ‘यह हॉकी नहीं, जादू था और ध्यानचंद हॉकी के जादूगर हैं।’ तभी से उन्हें हॉकी का जादूगर कहा जाने लगा।


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