नीतीश सरकार के उद्योग मंत्री समीर महासेठ के ठिकानों पर छापेमारी, जांच एजेंसियों ने एक साथ की बड़ी रेड

नीतीश सरकार के उद्योग मंत्री समीर महासेठ के ठिकानों पर छापेमारी, जांच एजेंसियों ने एक साथ की बड़ी रेड

पटना. नीतीश सरकार में उद्योग मंत्री समीर महासेठ के ठिकानों पर जांच एजेंसियों ने छापेमारी की है. समीर महासेठ के पटना सहित विभिन्न शहरों के ठिकानों पर जांच एजेंसियों ने छापेमारी की है. गुरुवार सुबह एक साथ उनसे जुड़े ठिकानो पर छापेमारी की. उनके यहां किन कारणों से छापेमारी हुई है इसे लेकर कुछ भी स्पष्ट नहीं किया जा रहा है. हालांकि यह छापेमारी आयकर की ओर से की जा रही है. छापेमारी एक निर्माण कंपनी पर हुई है जिसके डायरेक्टरों से महासेठ की नजदीकी बताई जाति है.  माना जा रहा है कि वित्तीय अनियमितता से जुड़े मामलों को लेकर जांच एजेंसियों के रडार पर समीर महासेठ आए हैं. उनका पुराना व्यवसायिक इतिहास रहा है जिस वजह से वित्तीय लेनदेन से जुड़े मामलों में उन पर छापेमारी होने का संदेह जताया जा रहा है.

विधानसभा चुनाव 2020 में समीर कुमार महासेठ ने राजद प्रत्याशी के रुप में लगातार दूसरी बार मधुबनी विधानसभा क्षेत्र से चुनाव में जीत दर्ज की. पूर्व मंत्री राजकुमार महासेठ के पुत्र समीर महासेठ को अगस्त 2022 में जब नीतीश कुमार ने एनडीए से नाता तोड़कर राजद और अन्य दलों के साथ महागठबंधन सरकार बनाई तब उन्हें 16 अगस्त को मंत्री बनाया गया. वे उद्योग विभाग का जिम्मा संभाल रहे हैं. 

समीर महासेठ पटना में व्यवसाय करते हैं. वैश्य समाज से आने वाले समीर की पहचान व्यवसायी के रूप में भी है. पिछले चुनाव में मधुबनी विधानसभा सीट से इन्होनें एनडीए के घटक दल रहे वीआइपी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे भाजता नेता सुमन महासेठ को पराजित किया था. इस बार के मंत्रिमंडल में वैश्य समाज से एकमात्र चेहरा समीर महासेठ ही रहे हैं. राजद ने इन्हें मौका देकर वैश्य समाज पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है.


समीर कुमार महासेठ पहली बार 2015 में विधायक निर्वाचित हुए थे. इस क्षेत्र से लगातार चार बार विधायक रहे भाजपा उम्मीदवार रामदेव महतो को पराजित कर समीर कुमार महासेठ पहली बार विधायक निर्वाचित हुए थे. इससे पहले वे स्थानीय क्षेत्र प्राधिकार, मधुबनी से विधान परिषद सदस्य भी चुने जा चुके हैं. वहीं 2015 में विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे और फिर से 2020 में उन्हें जीत हासिल हुई. हालांकि वे कांग्रेस के टिकट पर सीतामढ़ी से लोकसभा का चुनाव भी लड़े थे लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी. 


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