सत्ता के मद में अंधे हो गए हैं नीतीश! सारण गए... लेकिन शराबकांड में मारे गए लोगों के परिवार से मिलकर उनका आँसू पोछना मुनासिब नहीं समझा

सत्ता के मद में अंधे हो गए हैं नीतीश! सारण गए... लेकिन शराबकांड में मारे गए लोगों के परिवार से मिलकर उनका आँसू पोछना मुनासिब नहीं समझा

PATNA : बिहार में सत्ता निरंकुश हो गयी है और सरकार अहंकार में मदमस्त है।नीतीश की संवेदनहीन सरकार को जनता के दुख-दर्द से कोई लेना-देना नहीं रह गया है।मुख्यमंत्री सत्ता मद में चूर होकर शब्दों और व्यवहार की मर्यादा की सीमा को लांघने लगे हैं। मदांध और निरंकुश मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव जी सारण की धरती पर आप दोनो संवेदनहीनता की सीमा रेखा को भी तोड़ दिया। यह कहना है बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा का।

समाधान यात्रा में सीएम और डिप्टी सीएम के छपरा जिले में जिस तरह शराबकांड में मारे गए लोगों के परिवार को दरकिनार किया गया। उसको लेकर विजय कुमार सिन्हा ने सरकार के काम पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि पॉलिटिकल टूर पर सारण तो गए लेकिन गरीब, दलित, शोषित और कमजोर वर्ग के अनाथ बच्चों और विधवाओं से मिलकर उनका आँसू पोछना मुनासिब नहीं समझा..मुआवजा की बात तो छोड़ ही दें..जो मुख्यमंत्री "जो पिएगा वो मरेगा" जैसे संवेदनहीन वाक्यों का प्रयोग अपनी जनता के लिए करता हो उसका विचार स्वाभाविक तौर पर कुत्सित होगा। युवाओं को रोजगार देने के बदले लाठी चार्ज की रणनीति अपनाने वाली सरकार पर जनता का लाठी पड़ना तय है। कोई नहीं बचा सकता नीतीश जी आपको..गरीब और गरीबी विरोधी मानसिकता लेकर जो आप पॉलिटिकल पर्यटन पर निकले हैं उसका फैसला भी जनता जरूर करेगी।

पूछा - संगीनों के साए में कौन यात्रा करता है नीतीश जी

भला संगीनों के साये में कोई यात्रा करता है क्या? कौन सी समस्या आपने अपने ही शासनकाल में पैदा किया जिसकी वजह से समाधान यात्रा की जरूरत पड़ गई..हद है....आप और आपकी सरकार बेरोजगार और नौजवानों की आवाज को दबाने और प्रेस मीडिया से छुपाने का खेल खूब खेल रही है, यह आपके तानाशाही और निरंकुश शासन का ही प्रतीक है। जनप्रतिनिधियों की आवाज को दबाकर उनके साथ बंधुआ मजदूर के तरह व्यवहार करना - समस्या का समाधान नहीं, बल्कि यह लोकतंत्र और विधायिका का अपमान है।

बिहार में सामाजिक अराजकता का दौर

मुख्यमंत्री जी आपने पूरे बिहार में प्रशासनिक अराजकता का दौर पैदा कर दिया है। भ्रष्टाचार के नायक के रूप में बिहार की धरती पर आप काला इतिहास लिखने पर आमदा हैं। सता का मद और कुर्सी के मोह में पड़कर भ्रष्टाचार के राजकुमार तेजस्वी यादव का संरक्षण लेना बहुत भारी पड़ेगा। पलटुराम जी आपकी नीति और नियत को बिहार की जनता समझ चुकी है..बहुत जल्द आपकी कुर्सी जनता के दर्द और आह के जलजला में डूब जायेगी..और यह जो समस्या यात्रा आपने शुरू की है वह विदाई यात्रा में बदल जायेगी...

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