शव को देखते ही चित्कार से गूंज उठा समूचा गांव, रूपेश के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

शव को देखते ही चित्कार से गूंज उठा समूचा गांव, रूपेश के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग

डेस्क... बिहार की राजधानी पटना के पुनाइचक इलाके में मंगलवार की रात भरे बाजार में बदमाशों ने इंडिगो के स्टेट हेड रूपेश सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी। रूपेश अपने ऑफिस से लौट रहे थे। इसी दौरान मोटरसाइकिल पर आए बदमाशों ने उन पर गोलियां बरसा दीं। लगभग 10 गोलियों से रुपेश को दागा गया। वारदात में रूपेश घायल हो गए, जहां उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से जहां पूरा पटना गोलियों की थर्राहट से दहल गया, वहीं सुबह छपरा जिले के जलालपुर गांव में रुपेश का शव पहुंचा तो मानों चित्कार से समूचा गांव गूंज उठा। हर किसी के जुबां पर एक ही सवाल था कि आखिर रुपेश को क्यों मारा, इसकी तो किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। 

छपरा के जलालपुर गांव की वो गलियां जहां एक ऐसा शव पहुंचा, जिसकी मौत ने बिहार के सिस्ट पर कई सवाल छोड़ गया। सबसे अहम सवाल कि बिहार की जनता अब कितनी सुरक्षित है। जलालपुर में इंडिगो के मैनेजर रूपेश सिंह का शव जैसे ही पहुंचा पूरा गांव चित्कार से गूंजा उठा। मौके पर पहुंचे महारजगंज से भाजप सांसद जर्नादन सिंह सिग्रिवाल ने अपने हीसरकार के सिस्टम को फेल्योर बता दिया। सांसद ने कहा कि इस जघन्य अपराध की कोई माफी नहीं है और जल्द से जल्द अपराधियों को पकड़ने के लिए सरकार को ठोस रणनीति बनानी चाहिए। 

छपरा के जलालपुर में रूपेश सिंह का शव जब आज पहुंचा तो गांव के रहवासियों के कदम यकायक ही उनकी घर की ओर चल दिए। सभी गलियां सूनसान हो गई और लोगों का बड़ा जमावड़ा रूपेश सिंह के घर पर लग गया। 

पटना एयरपोर्ट पर रूपेश लगभग 12 सालों से काम कर रहे थे
गोवा से छूट्टियों से लौटे रूपेश ने मंगलवार को आते ही तत्परता से काम संभाल लिया था। विमानों में बुकिंग की स्थिति से एयरपोर्ट पर होने वाले हर वीवीआईपी मूवमेंट तक की जानकारी ली और एयरपोर्ट के अधिकारियों से मुलाकात की थी। एयरपोर्ट पर वैक्सीन लाए जाने के दौरान भी रूपेश की सक्रियता बनी रही। अफसरों से छुट्टियों में बिताए पलों के बारे में थोड़ी बहुत बात की और फिर काम में जुट गए। पटना एयरपोर्ट पर रूपेश लगभग 12 सालों से काम कर रहे थे।

पुलिसकर्मी के बेटे थे मैनेजर
बताया गया है कि मैनेजर के पिता पुलिस महकमे में थे। पिछले छह साल से वह पुनाईचक स्थित कुसुम विलास अपार्टमेंट में रह रहे थे। तब से अबतक उनका यहां पर किसी से कोई विवाद नहीं था। ऐसे में उनकी इस तरह हत्या क्यों कर दी गई, हर कोई अनुत्तरित था।  बताया गया है कि मैनेजर पहले स्कॉर्पियो से चलते थे। धनतेरस पर उन्होंने काले रंग की नई लग्जरी कार खरीदी थी। इसी कार में बैठे रहने के दौरान बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। बताया गया है कि मैनेजर ने गाड़ी चलाने के लिए कोई चालक नहीं रखा था। वह खुद ही कार चलाते थे। घटना से पहले वह खुद एयरपोर्ट से कार चलाते हुए अपार्टमेंट के गेट पर पहुंचे थे।

वहीं गांव के लोगों में पुलिस प्रशासन को लेकर काफी आक्रोश दिखा। हालाकि क्षेत्रिये सांसद पीड़ित के घर पहुंचकर सांत्वना देकर इसे अपूर्णीय क्षति बताई। इस दौरान सरकार की गुप्तर एजेंसी पर जमकर बरसे और कहा कि ये उनकी विफलता है कि कोई किसी की रैकी करेगा और उन्हें पता भी नहीं चलेगा। हालाकि इस घटना के बाद से सरकार पर सवाल उठने लगे हैं और सरकार ने बड़ा आदेश देते हुए 48 घंटे में अपराधियों को पकड़ने के लिए कहा है। 

घटना को लेकर लापरवाही आई सामने 

पुलिस की लाख हिदायत के बावजूद अपार्टमेंट की सुरक्षा में खामी साफ तौर पर उजागर हुई। जिस कुसुम विलास अपार्टमेंट के गेट पर इंडिगो के मैनेजर रुपेश सिंह की हत्या हुई, उस अपार्टमेंट में कुल पांच सीसीटीवी कैमरे लगे पाये गए, लेकिन एक भी कैमरा चालू नहीं था। अपार्टमेंट के गार्ड मनोज कुमार ने बताया कि जब से कैमरा लगा है, तभी से बंद है। यदि सीसीटीवी कैमरा चालू होता तो बदमाशों की तस्वीर फुटेज में जरूर कैद हो जाती है। इससे पुलिस को जांच में मदद मिलती और अपराधी जल्द पकड़ लिए जाते। 


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