यूपी में पहली बार लव जिहाद मामले में सजा : जिला कोर्ट ने आरोपी को दी 10 साल की सजा, 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

यूपी में पहली बार लव जिहाद मामले में सजा : जिला कोर्ट ने आरोपी को दी 10 साल की सजा, 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया

UP DESK. खबर उत्तर प्रदेश से है. यहां पहली बार लव जिहाद मामले में कोर्ट ने सजा सुनाई है. लव जिहाद के आरोप से जुड़े एक मामले में कानपुर जिला कोर्ट ने सुनवाई करते हुए आरोपी को 10 साल की सजा सुनाई है. साथ ही आरोपी पर 30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है. बता दें कि इसी साल फरवरी में ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021’ नाम से कानून बना था. इसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है. साथ ही 25 हजार रुपए जुर्माना भी तय किया गया है. इसी के तहत मुस्लिम युवक को सजा सुनाई गयी है.

कानपुर का यह मामला 2017 का है. यहां की कच्ची बस्ती की एक किशोरी के परिजनों ने मुस्लिम समुदाय से आने वाले एक युवक पर प्रेम प्रसंग का झांसे देकर शादी के लिए धर्म परिवर्तन कराने का मामला दर्ज करवाया था. किशोरी ने अपने आवेदन में कहा  था कि युवक ने खुद को हिंदू बताते हुए उसे अपना नाम मुन्ना बताया. बाद में दोनों की नजदीकियां बढ़ने लगीं. धीरे-धीरे दोनों में प्रेम संबंध हो गए. फिर आरोपी किशोरी को शादी का झांसा देकर अपने साथ भगा ले गया.

बेटी के लापता होने के बाद पीड़ित परिवार ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने अगले ही दिन आरोपी को गिरफ्तार कर किशोरी को बरामद कर लिया था. पीड़िता की मां की तहरीर पर पॉक्सो एक्ट समेत रेप की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आरोपी को जेल भेज दिया था. पीड़िता ने बताया कि युवक ने खुद को हिंदू बनाकर उससे दोस्ती की थी. इसके बाद शादी का झांसा देकर साथ ले गया. जब वह उसके घर पहुंची, तो उसे अपना असली धर्म बताकर निकाह करने के लिए दबाव बनाया गया. इस पर लड़की ने इनकार कर दिया.

बता दें कि यूपी में फरवरी 2021 में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ ‘उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध विधेयक 2021’ नाम से कानून लागू हुआ था. इसमें बहला-फुसला कर, जबरन, छल-कपट कर, लालच देकर या विवाह के लिए एक धर्म से दूसरे धर्म में किया गया परिवर्तन गैरकानूनी माना गया है. ऐसा करने पर अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है. साथ ही 25 हजार रुपए जुर्माना भी होगा. इस कानून का सपा, बसपा और कांग्रेस ने काफी विरोध किया था. यूपी से पहले मध्यप्रदेश में इसके खिलाफ कानून बन चुका था. इसके अलावा कर्नाटक, हरियाणा और गुजरात में भी यह कानून लागू है.


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