सजा पूरी होने के बाद भी जेल में 40 दिन से बंद है बांग्लादेशी महिला, पुलिस- प्रशासन ने रिहा कर वापस भेजने का नहीं किया कोई इंतजाम

सजा पूरी होने के बाद भी जेल में 40 दिन से बंद है बांग्लादेशी महिला, पुलिस- प्रशासन ने रिहा कर वापस भेजने का नहीं किया कोई इंतजाम

नालंदा। सरकार की व्यवस्था कहे या सिस्टम की लापरवाही जिस कारण सजा पृूरी करने के बाद भी एक विदेशी महिला बिहारशरीफ जेल में बंद है। वह भी एक दो दिन नहीं, बल्कि पूरे 40 दिन से। जेल में बंद महिला अपनी रिहाई का इंतजार कर रही है, ताकि वह अपने वतन वापस लौट सके। लेकिन स्थानीय जिला प्रशासन की लापरवाही के कारण महिला को अब बिना गलती के सजा भुगतना पड़ रही है। 

 मामला नूरसराय थाना इलाके का है। जहाँ पुलिस ने वर्ष 2019 को अहियापुर मोड़ से बांग्लादेशी महिला रिया आफरीन रूपा भटकते हुए बरामद किया था। पूछताछ में महिला ने अपनी पहचान बांग्लादेश निवासी रूपा बताते हुए वर्तमान पता पश्चिम बंगाल बताया। इसके बाद पुलिस ने महिला को शांति कुटीर भेज दिया। मगर पुलिस जांच में महिला की पहचान बांग्लादेश के खुलना जिला के खलिसपुर थाना क्षेत्र निवासी मो. शाहजहां की पत्नी रिया आफरीन रूपा के रूप में की गई। महिला पश्चिम बंगाल से नहीं  बल्कि बांग्लादेश से नालंदा आई थी। उसके पास भारत आने संबंधी किसी तरह का दस्तावेज नहीं था। इस कारण विदेशी अधिनियम की धारा के तहत केस दर्ज कर उसे न्यायालय के सुपुर्द कर दिया गया। जिस कारण कोर्ट ने उसे 1 वर्ष 7 दिन की सजा सुनाई। महिला की सजा 22 जनवरी को पूर्ण हो गई। कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में सजा पूरी होने के बाद, एसपी को महिला को विदेश भेजने में सहयोग करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी उसे बांग्लादेश भेजने का प्रबंध नालंदा पुलिस या जिला प्रशासन ने नहीं किया। इस कारण महिला जेल में ही कैदी की तरह रह रही है। जेल प्रशासन ने इस बाबत नालंदा एसपी को पत्र भेजकर कोर्ट की टिप्पणी से अवगत करा दिया था।

मिली थी 1 साल 7 दिन की सजा

रिया आफरीन रूपा को 5 दिसंबर 2019 को जेल लाया गया। कोर्ट ने उसे एक वर्ष की सजा सुनाते हुए 500 रुपए का जुर्माना मुकर्रर किया था। जुर्माना नहीं देने पर 7 दिनों की उसे अतिरिक्त सजा मिली। 22 जनवरी 2021 को रूपा की सजा पूरी हो गई। 

सजा पूरी होने के बाद भी 40 दिनों से बंदियों की तरह है रूपा:- 

सजा पूरी करने के बाद भी रूपा 40 दिनों से जेल में बंदियों की तरह रह रही है। इसके बाद जिला या पुलिस प्रशासन ने उसे विदेश भेजने की व्यवस्था नहीं की। जबकि, कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में स्पष्ट निर्देश दिया था कि विदेश मंत्रालय या गृह विभाग से संपर्क कर रूपा को विदेश भेजने की व्यवस्था की जाए।

पेंटिंग बना काटी सजा

जेल सूत्रों की मानें तो महिला का भरापूरा परिवार है। भटककर वह किसी तरह नालंदा आ गई। जेल की दीवारों पर रूपा ने पेंटिंग बनाकर अपनी सजा पूरी की। सजा पूरी होने के बाद उसे बांग्लादेश भेजने का प्रबंध नहीं हुआ। इस कारण वह कैदियों की तरह जेल में रह रही है।

जेल प्रशासन ने एसपी को लिखा था पत्र

सजा पूरी होने के पहले जेल अधीक्षक प्रभात कुमार ने नालंदा एसपी को पत्र भेजकर कोर्ट की टिप्पणी से अवगत करा दिया था। जेल अधीक्षक ने बताया कि 29 जनवरी 2021 को पत्र भेजकर एसपी को कोर्ट की टिप्पणी से अवगत करा दिया गया था। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि एसपी की सहायता से महिला को बांग्लादेश भेजने का प्रबंध किया जाएगा। 

दलाल के मार्फ़त आई थी भारत

रिया आफ़रीन एक दलाल के झांसे में आकर अवैध तरीके से भारत आ गई और अब कैदी के रूप में जेल की चहारदीवारी में कैद है। वर्ष 2019 में तत्कालीन प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी मानवेन्द्र मिश्र की कोर्ट में रिया ने बयान दिया था कि  बांग्लादेश में उसके बच्चे का ऑपरेशन होना था। जिसके लिए काफी पैसे की जरूरत थी। एक दलाल ने उसे भरोसा दिया कि वह उसे भारत में काम दिला देगा। कमाई कर लौट जाना। बच्चे का इलाज करा लेना। लेकिन दलाल उसे  भारत लाकर यूं ही लावारिस भटकने के लिए छोड़ दिया | उनके दो बच्चे हैं | 

क्या बोले पीपी 

बिहारशरीफ कोर्ट के पीपी अधिवक्ता मो.कैंसर इमाम ने बताया कि महिला ने 40 दिनों पूर्व ही अपनी सजा पूरी कर ली है। एसपी के द्वारा प्रयास किया जा रहा है। किसी भी दूसरे देश के व्यक्ति को उनके वतन पहुंचाने की एक प्रकिया होती है जिसमें थोड़ा वक्त लगता है। इन्हें भी जल्द उनके वतन भेज दिया जाएगा।

महिला दिवस पर हो रिहा

आगामी आठ मार्च को विश्व महिला दिवस है, ऐसे में स्थानीय प्रशासन के लिए यह सबसे बेहतर अवसर है कि वह बांग्लादेशी महिला को जेल से रिहा कर उन्हें वापस उसके मुल्क भेजने की व्यवस्था करे। हम उम्मीद करेंगे कि आनेवाले महिला दिवस पर प्रशासन महिला को जेल से रिहा कर देगी। 

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