होटलों और रेस्टोरेंट में खाने के बाद देना होगा सर्विस चार्ज, हाई कोर्ट ने हटाई रोक

होटलों और रेस्टोरेंट में खाने के बाद देना होगा सर्विस चार्ज, हाई कोर्ट ने हटाई रोक

NEW DELHI : पिछले कुछ दिनों से होटलों और रेस्टोरेंट में लिए जाने वाले सर्विस चार्ज की खूब चर्चा हो रही है। दिल्ली सहित बिहार में भी सरकार की तरफ से निर्देश जारी कर बताया गया कि रेस्टोरेंट और होटलों में सर्विस चार्ज देना जरुरी नहीं है। लेकिन अब फिर से वही पुरानी स्थिति बहाल हो गई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने सर्विस चार्ज पर रोक को लेकर सरकार के फैसले को हटा दिया है।

दरअसल, 4 जुलाई को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने गाइडलाइन जारी की थी। इसके मुताबिक, होटल और रेस्टोरेंट बिल में सर्विस चार्ज नहीं जोड़ सकते। लेकिन ग्राहक की मर्जी होगी तो वे स्वइच्छा से सर्विस चार्ज का भुगतान कर सकते हैं। 

इसके बाद NRAI और अन्य की ओर से वकील नीना गुप्ता और अनन्या मारवाह ने याचिका दायर की थी। इसमें केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) द्वारा होटल और रेस्टोरेंट द्वारा वसूले जाने वाले सर्विस चार्ज पर रोक के संबंध में 'अनुचित व्यापार प्रथाओं को रोकने और उपभोक्ता अधिकारों के उल्लंघन' के लिए जारी गाइडलाइन को रद्द करने की मांग थी।

विचार करने की जरुरत

जस्टिस यशवंत वर्मा ने NRAI और फेडरेशन ऑफ होटल्स एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन ऑफ इंडिया की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए CCPA के 4 जुलाई के दिशानिर्देशों को चुनौती देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर विचार करने की जरूरत है। उन्होंने इस मामले में अधिकारियों का अपना जवाब दाखिल करने को भी कहा है।

क्या होता है सर्विस चार्ज?
 जब आप किसी प्रोडक्ट या सर्विस को खरीदते हैं तो उसके लिए कुछ पैसे देने पड़ते हैं। इसे ही सर्विस चार्ज कहते हैं। यानी होटल या रेस्टोरेंट में खाना परोसने और दूसरी सेवाओं के लिए ग्राहक से सर्विस चार्ज लिया जाता है। ग्राहक भी होटल या रेस्टोरेंट से बिना सवाल-जवाब किए सर्विस चार्ज के साथ पेमेंट कर देते हैं। हालांकि ये चार्ज ट्रांजैक्शन के समय ही लिया जाता है, न की सर्विस लेते वक्त। हालांकि सर्विस चार्ज कितना वसूला जाए इसको लेकर कोई सरकारी गाइड लाइन नहीं है, इसी के चलते होटल या रेस्टोरेंट संचालक अपने हिसाब से मनमाने तौर पर सर्विस चार्ज लेते हैं।


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