दीवाली पर विशेष : मां काली के रूप में होती है पीपल के पेड़ की पूजा, जानिए क्या है डेढ़ सौ साल से चली आ रही मंदिर की इस परंपरा का राज

दीवाली पर विशेष : मां काली के रूप में होती है पीपल के पेड़ की पूजा, जानिए क्या है डेढ़ सौ साल से चली आ रही मंदिर की इस परंपरा का राज

KATIHAR : काली पूजा को लेकर देशभर में अलग-अलग मंदिरों में कई अलग अलग तरीके से आयोजन होता है मगर आज कटिहार के एक ऐसे काली मंदिर के कहानी आपको बता रहे हैं जिसे सुनकर आप भी मन्नते पूरा करने वाली इस काली मंदिर में एक बार जरूर आना चाहेंगे दरअसल कटिहार राजवाड़ा के बम काली स्थान का इतिहास डेढ़ सौ साल से भी अधिक पुराना है, इस काली मंदिर में मां काली का कोई स्थाई प्रतिमा नहीं है पीपल के पेड़ में ही मां के रूप मानकर यहां पूजा किया जाता है।

 बड़ी बात यह है इस काली मंदिर में लोगों की मन्नत पूरा होने की कई चर्चित कहानी के कारण सिर्फ कटिहार जिला ही नही बल्कि आसपास के अन्य राज्य और पड़ोसी देश नेपाल से भी बम काली दरबार में भक्त आते हैं, इस काली मंदिर से जुड़े एक और अनोखा बात यह भी है कि इस मंदिर में कोई पुजारी नहीं है, कोई भी व्यक्ति कभी भी आकर साल भर पूजा अर्चना कर सकते हैं, इस मंदिर से जुड़े ऐसे ही आस्था के अनोखी कहानी पर मंदिर कमेटी से जुड़े लोगो ने विशेष जानकारी दी।

मंदिर से जुड़ी यह कहानी है प्रचलित

मंदिर से जुड़े शंभू कुमार चौबे का कहना है कि यहां कभी मां काली की मूर्ति स्थापित नहीं की गई। उनका कहना है कि लगभग डेढ़ सौ साल पहले यहां रेल लाइन बिछाई जा रही थी, जिसके लिए कई बार पुल बनाने की कोशिश की, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। इस दौरान माता सपने में आकर बताया कि वह एक वृक्ष में हैं, जिसका लोगों ने पूजा करना शुरू कर दिया। हालांकि समय के साथ वह पेड़ सूख गया। लेकिन यह मां का चमत्कार था कि वह इस सूखी हुुई पेड़ से फिर के एक पौधे के रूप में अवतरित हुई। तब से लगातार बमकाली के रूप में इस पेड़ की पूजा की जाती है। शंभू कुमार ने बताया कि मां बमकाली की लोकप्रियता ऐसी है कि यहां बिहार के साथ सभी राज्यों से लोग पूजा पाठ के लिए आते हैं।

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