‘शिक्षा एक्सप्रेस’ बनी बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र, स्कूली बच्चे ही होते हैं सवार

‘शिक्षा एक्सप्रेस’ बनी बच्चों के लिए आकर्षण का केंद्र, स्कूली बच्चे ही होते हैं सवार

GAYA: देश में कोरोनाकाल में लगे लॉकडाउन के दौरान सबकुछ बंद था. खासकर बच्चों की सेहत का हवाला देते हुए केंद्र सरकार ने स्कूल- कॉलेजों को अगले आदेश तक बंद कर दिया था. अब धीरे धीरे जिंदगी पुराने ढर्रे पर चलने लगी है, बच्चे स्कूल और कॉलेजों में आने लगे हैं. इसी बीच गया जिले के कुछ बच्चे लॉकडाउन के बाद से रेलगाड़ी में बैठकर पढ़ाई करने लगे हैं.

गया जिले के टनकुप्पा प्रखण्ड के बहसा पिपरा पंचायत के गंजोई खुर्द गांव के विद्यालय में बड़ा बदलाव हुआ है. लॉकडाउन में बंद राजकीयकृत मध्य विद्यालय को बिल्कुल नया रूप देकर रेलवे की तर्ज पर सजाया गया है. इस ट्रेन को शिक्षा एक्सप्रेस नाम दिया गया. इस स्कूल को इस तरीके से पेंट किया गया है कि दूर से देखने पर यह ट्रेन जैसा नजर आता है. कमरों के प्रवेश द्वार और खिड़कियों को भी रेलगाड़ी जैसा ही सजाया है.

11 महीने के बाद 1 मार्च से इस मध्य विद्यालय को खोला गया है और अब बच्चे यहां आने के लिए उत्सुक रहते हैं. बच्चों को यह सपने जैसा लगता है और वह इस बदलाव से काफी खुश हैं. स्कूल के प्राचार्य ने बताया कि इस प्रयोग से बच्चे रोज स्कूल आने लगे है और अब उनका मन पढ़ाई में भी लगने लगा है. लॉकडाउन के दौरान प्रिंसिपल ने टीचरों के साथा मीटिंग की थी जिसमें यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया. अब इसी शिक्षा एक्सप्रेस पर सवार होकर बच्चे अपना आगे का भविष्य बनाने में लगे हैं. 




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