सगे भाई के आगे मंहगी पड़ गई लौकी की कीमत, बड़े भइया ने छोटे की कर दी हत्या

सगे भाई के आगे मंहगी पड़ गई लौकी की कीमत, बड़े भइया ने छोटे की कर दी हत्या

ARA : हत्या की कई वजहें सामने आती है, लेकिन शायद ही कभी यह सुनने को मिला होगा कि लौकी के एक पौधे के लिए किसी की जान ले ली जाए। मरनेवाला भी कोई और नही रिश्ते में सगा भाई हो। भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड में बहोरनपुर ओपी इलाके की है। जहां लौके के पौधे को लेकर हुए विवाद में बड़े भाई ने अपने ही छोटे भाई की हत्या कर दी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपी भाई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

मामले में बहोरनपुर ओपी के इंचार्ज सत्येंद्र कुमार सत्यार्थी ने बताया मृतक का नाम अशोक चौधरी (35 वर्ष) था। वह गौरा गांव निवासी सोमारू चौधरी के पुत्र थे। वह मजदूरी कर अपने परिवार की जीविका चलाता थे। बताया गया कि घर में लगे लौकी (कद्दू) तोड़ने को लेकर मंगलवार की सुबह औरतों के बीच विवाद हुआ था। इसी विवाद में शाम में भी झगड़ा हुआ। फिर रात में बात फिर बिगड़ गयी और औरतों के बीच भी बकझक हुआ। इसी विवाद में मारपीट हुई। बताया जाता है कि झगड़े के दौरान लोह के रॉड  मारकर छोटे भाई को गंभीर रूप से घायल कर दिया। जख्मी को परिजन अभी अस्पताल ले जाने की तैयारी में ही थे कि इसी बीच उनकी मौत हो गयी। मामले में मृतक की पत्नी ने अपने जेठ जितेन्द्र चौधरी उर्फ सुखड़ी चौधरी को हत्या करने का आरोपित किया गया है। आरोपित भाई को गिरफ्तार कर लिया गया है।

हत्या नहीं हादसा

जहां मृतक के परिजन इसे हत्या की घटना करार दे रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ आरोपी भाई के परिवार का कहना यह एक हादसा था. उनका कहना था कद्दू तोड़ने को लेकर झगड़ा हुआ था। जिसमें दोनों परिवार की तरफ से धक्का मुक्की की गई। इस दौरान लोहे का रॉड धंसने के कारण अशोक गंभीर जख्मी हो गये। जख्मी को परिजन अभी अस्पताल ले जाने की तैयारी में ही थे कि इसी बीच उनकी मौत हो गयी।  वहीं गांव के कुछ लोगों के अनुसार मंगलवार की रात झगड़े के दौरान अशोक चौधरी छत से गिर पड़ा था। छत से गिरने के दौरान लोहे का सरिया उनके सीने में धंस गया। इससे उनकी मौत हो गयी।  पुलिस ने बताया कि पूछताछ व जांच में इस बात की जानकारी मिली है कि पारिवारिक विवाद में घर में पहले भी कई बार झगड़ा हो चुका था। 

काम छुटने के बाद गुजरात से लौटा था घर

कोरोना संकट के कारण गुजरात के राजकोट में मजदूरी का काम छूटने के कारण अशोक अपने गांव लौटा था। वह यही मजदूरी कर पत्नी और चार संतानों का भरण-पोषण करता था। वह सोचता था कि घर पर रहकर मजदूरी कर लेगा और परिवार की ख्याल भी। परिवार में औरतों के बीच बात-बात पर होने वाले झगड़ों से वह गुजरात नहीं लौट रहा था। मजदूर की हत्या के बाद 4 बच्चों के सिर से पिता की छत्र छाया उठ गया है। बताया जाता है कि मृतक के तीन पुत्र व एक पुत्री है। घटना के बाद मृतक की पत्नी सरिता देवी व मासूम बच्चों का रो-रोकर हाल बेहाल हो गया है। मृतक मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था।


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