RCP टैक्स वसूल कर CO की ट्रांसफर-पोस्टिंग की ? शिकायत तो पिछले साल भी थी पर बाल-बाल बचे थे, इस बार CMO था सतर्क तो पलटना पड़ा फैसला

RCP टैक्स वसूल कर CO की ट्रांसफर-पोस्टिंग की ? शिकायत तो पिछले साल भी थी पर बाल-बाल बचे थे, इस बार CMO था सतर्क तो पलटना पड़ा फैसला

PATNA:  बिहार में जून महीने में अधिकांश विभागों में अधिकारियों का स्थानांतरण किया जाता है। वैसे अधिकारियों का जिनका एक स्थान पर तीन साल की अवधि पूरी हो गई हो उनलोगों को स्थानांतरित कर नये अफसरों की पोस्टिंग की जाती है। 2022 जून महीने में भी कुछ एक विभागों को छोड़ दें तो अधिकारियों का स्थानांतरण-पदस्थापन हुआ। लेकिन मामला केवल राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग में ही फंसा। आखिर फंसे भी तो क्यों नहीं। इस बार भी तबादला को उद्योग का रूप दे दिया गया था। बताया जाता है कि तबादले में नियमों का पालन नहीं किया गया। लिहाजा मामला मुख्यमंत्री के पास पहुंच गया. नतीजा हुआ कि स्थानांतरण आदेश को ही रद्द करना पड़ा। इसके पहले 2020 में भी राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के स्थानांतरण आदेश को स्थगित कर दिया गया था। बड़ा सवाल यही है कि क्या अब भी बिहार में आरसीपी टैक्स लिया जा रहा? 

सीओ के ट्रांसफर-पोस्टिंग में होता है बड़ा खेल

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का विवादों से गहरा नाता रहा है। इस विभाग के तहत ही सभी अंचल आते हैं। अंचलों में अंचलाधिकारी की तैनाती इसी विभाग के द्वारा की जाती है। अंचलाधिकारी से सबकी जरूरत होती है। लिहाजा इस पर माननीयों की खासी नजर होती है। जमीन संबंधी मामलों में अंचलाधिकारी की बड़ी भूमिका होती है। विधायक चाहते हैं कि उनके अनुरूप क्षेत्र का सीओ हो। लिहाजा सत्ता पक्ष और विपक्ष के विधायक अपनी सिफारिश विभाग को देते हैं। वैसे तो बिहार के अधिकांश मालदार विभागों में अधिकारियों के स्थानांतरण में बोली लगने की चर्चा होती है। लेकिन कुछ एक ऐसे विभाग हैं जो बदनाम हैं। उन्हीं विभागों में एक है राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग। जानकार बताते हैं कि अंचल में सीओ के पद पर पोस्टिंग को लेकर ऊंची बोली लगती है। जो सीओ ऊंची बोली लगाता है उसे अंचलाधिकारी के तौर पर अच्छी जगह पर पोस्टिंग मिलती है। फिर वही अफसर फील्ड में जाकर दोनों हाथ से वसूली करता है।इस तरह से सरकार की भारी बदनामी होती है। यानी भ्रष्टाचार ऊपर के नीचे पहुंचता है। 


2020 और 2022 में एक समान शिकायत और कार्रवाई  

बिहार में 2020 में भी अंचलाधिकारी के स्थानांतरण में भारी शिकायत मिली थी। तब मामला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास पहुंचा था। इसके बाद सीएम नीतीश कुमार ने तत्कालीन बीजेपी कोटे के राजस्व मंत्री रामनारायण मंडल के सीओ स्थानांतरण आदेश को रद्द करवा दिया था। एक बार फिर से वही स्थिति आ गई है. तब और अब में मंत्री को छोड़ सब कुछ समान है। इस बार केवल मंत्री बदले हैं। तब बीजेपी कोटे से रामनारायण मंडल मंत्री थे, अब भाजपा कोटे के ही रामसूरत राय हैं।बताया जाता है कि इस बार भी कई तरह की शिकायत मिलने पर सीएमओ हरकत में आया। मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया फिर स्थानांतरण रद्द करने की कार्रवाई की गई। बता दें, 2021 में भी सीओ के स्थानांतरण में मंत्री रामसूरत राय की मनमर्जी के खिलाफ सत्ताधारी गठबंधन के विधायकों ने मुख्यमंत्री से शिकायत की थी। एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में जेडीयू-बीजेपी के विधायकों ने मुख्यमंत्री के सामने ही विभाग के मंत्री रामसूरत राय की शिकायत की थी। 

तबादला सबने किया लेकिन बदनामी राजस्व का 

बिहार में 30 जून को कृषि,सहकारिता, सामान्य प्रशासन,परिवहन से लेकर एक दर्जन विभागों में अधिकारियों का स्थानांतरण हुआ। लेकिन चर्चा सबसे अधिक राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की रही. बताया जाता है कि स्थानांतरण को लेकर विभाग के मंत्री व आला अधिकारियों की शिकायत मुख्यमंत्री के पास पहुंची। इसके बाद पूरे तबादला आदेश की समीक्षा की गई। बताया जाता है कि इस बार सीओ व राजस्व सेवा के अधिकारियों के ट्रांसफर में भारी मनमर्जी की गई थी। जिनका तीन सालों का कार्यकाल पूरा नहीं हो रहा था उनका भी ट्रांसफऱ किया गया। साथ ही नियम विरूद्ध एक ही जिला में एक अंचल से उठाकर दूसरे अंचल में पदस्थापित कर दिया गया। इसके अलावे स्थानांतरण में लेन-देन के भी गंभीर आरोप लगे। नतीजा यह हुआ कि राजस्व सेवा के 186 अधिकारियों का स्थानांतरण आदेश को रद्द कर दिया गया। इनमें 149 सीओ हैं। 

अब भी लगता है आरसीपी टैक्स? 

बता दें, बिहार में अधिकारियों के स्थानांतरण में टैक्स लेने की खूब चर्चा होती है। विपक्ष अब तक उस टैक्स को आरसीपी टैक्स बताता रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव समेत पूरा विपक्ष सड़क से लेकर सदन तक में कहते रहा है कि बिहार में आरसीपी टैक्स के बिना कुछ भी नहीं होता।अफसरों से आरसीपी टैक्स वसूल किया जाता है। आरसीपी टैक्स दीजिए और मनचाही पोस्टिंग लीजिए। आरसीपी टैक्स पर बिहार में खूब राजनीति हो चुकी है। राजद जहां आरसीपी टैक्स के बहाने सीएम नीतीश को घेरने का कोई मौका नहीं चुकती थी। तेजस्वी यादव इस टैक्स  के बहाने नीतीश कुमार से सबसे नजदीक रहे आरसीपी सिंह पर निशाना साधते थे। कई दफे विधानसभा में आरसीपी टैक्स पर काफी बवाल भी मचा। जेडीयू के विरोध के बाद तेजस्वी यादव ने आरसीपी टैक्स का फुल फार्म भी बताया था । कहा था आरसीपी टैक्स का मतलब है – रिजर्व कमीशन प्रिवलेज टैक्स .


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