बिहार में बिजली का इस्तेमाल होगा महंगा, कंपनियों ने दरों में बढ़ोतरी का दिया प्रस्ताव

बिहार में बिजली का इस्तेमाल होगा महंगा, कंपनियों ने दरों में बढ़ोतरी का दिया प्रस्ताव

PATNA : बिहार में बिजली की दरें बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बताया जा रहा है कि आगामी वित्तीय सत्र से बिजली उपभोक्ताओं को दस फिसदी अधिक बिजली बिल का भुगतान करना पड़ेगा। इस संबंध में बिजली कंपनी की ओर से बिहार विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष नए प्रस्ताव पेश किया गया है। जिसमें अगर आयोग की मंजूरी मिलती है तो यह दरें बिहार में अगले साल अप्रैल से प्रभावी हो जाएंगी। 

 बिजली कंपनी के द्वारा टैरिफ पिटिशन में बिजली की दर औसत 10% तक बढ़ाए जाने की बात कही गई है. बिजली कंपनी ने बिजली की खरीद और दूसरे मदों में खर्च बढ़ने की वजह से बढ़ोतरी को वजह बताया है। प्रस्ताव में बिजली कंपनियों की तरफ से शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए 0 से 100 वाले स्लैब को खत्म किए जाने का प्रस्ताव दिया गया है. पिछले शहरी क्षेत्र में 0 के 100 यूनिट 101 से 200 यूनिट और 201 से अधिक तीन तरह के स्लैब थे. जिसमें बदलाव करने की तैयारी है। बिजली कंपनियों के अनुसार शहरी क्षेत्र में लगभग हर घर में टीवी, फ्रिज और वाशिंग मशीन समेत कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है, ऐसे में यह तय किया गया है कि शहरी क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए दो ही स्लैब रखे जाएं. अब नए प्रस्ताव में 0-200 यूनिट और दूसरा स्लैब 201 यूनिट और उससे अधिक का होगा

उद्योगो के लिए भी प्रस्ताव

कंपनी ने औद्योगिक कनेक्शन के लिए नई श्रेणी तय कर दी है। कंपनी का तर्क है कि छोटे उद्योगों के लिए अलग से श्रेणी एलटीआईएस है। जबकि बड़े उद्योगों के लिए एचटीएस है। लेकिन इसमें उद्योग के अलावा मॉल जैसे व्यवसायिक प्रतिष्ठान भी कनेक्शन लिया करते हैं। इससे यह पता नहीं चल पाता है कि वास्तविक में औद्योगिक कनेक्शन की संख्या कितनी है। इसे देखते हुए कंपनी ने तय किया है कि बड़े उद्योगों के लिए एचटीआईएस श्रेणी अलग से हो। हालांकि इससे बिजली दरों में कोई असर नहीं होगा।

खर्च को लेकर पैसों की मांग

याचिका में 2020-21 में हुए वास्तविक खर्च और आमदनी के साथ ही विनियामक आयोग की ओर से बीते वर्ष दी गई खर्च की मंजूरी का ब्योरा दिया गया है। वहीं मौजूदा वित्तीय वर्ष 2021-22 में बिजली कंपनी की संभावित आमदनी और खर्च का ब्योरा दिया गया है। कंपनी ने आगामी वित्तीय वर्ष 2022-23 में होने वाले खर्च का आकलन करते हुए विनियामक आयोग से पैसे की मांग की है।


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