यह है बिहार के सरकारी अस्पताल की हालत, यहां मरीज के बेड पर न चादर और न ओढ़ने के लिए मिलता है कम्बल

यह है बिहार के सरकारी अस्पताल की हालत, यहां मरीज के बेड पर न चादर और  न ओढ़ने के लिए मिलता है कम्बल

मोतिहारी।  सरकार बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था देने का जितना भी दावा कर ले ।मोतिहारी  सदर अस्पताल सरकार व स्वास्थ्य विभाग के बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। कड़ाके के ठंड से जहा आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। वहीं अस्पताल में भर्ती मरीजों को न डाक्टर देखने आते हैं न ही बेड पर चादर व ओढ़ने के लिए कंबल ही नसीब होता है।मरीज अस्पताल में भले ही बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था सुनकर पहुचते है।लेकिन अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही से मरीज भगवान भरोसे ही रहते हैं।

मोतिहारी शहर के सदर अस्पताल जो गरीबों के लिए एक उम्मीद है। जिलाप्रशासन और सदर अस्पताल प्रशासन इसकी व्यवस्था को लेकर खूब अपना पीठ थपथपा रही है। वहीं ठंड के रात को  सदर अस्पताल की पड़ताल की गई तो  वास्तविकता जो देखने को मिली वह जिलाप्रशासन और सदर अस्पताल प्रशासन के दावों पोल खोलने के लिए काफी है। एक दुर्धटनाग्रस्त मरीज जो सदर अस्पताल में  2 बजे दिन में भर्ती किया गया परन्तु रात को 8 बजे तक कोई डाँक्टर उसको देखना उचित नहीं समझ रहे है। यही है सदर अस्पताल की व्यवस्था।

 बात यही पर खतम नहीं होती है आगे जब सर्जिकल वार्ड के तरफ बढे़ तो मरीज तो बेड पर भर्ती थे पर किसी बेड पर चादर ना किसी मरीजों को ओड़ने के लिए कंबल सदर अस्पताल प्रशासन के तरफ से दिया गया था। गरीब मरीज खाली बेड पर ही सोये हुए थे। इस विषय पर डियूटी पर ANM से पूछा गया तो वह अपना पलड़ा झारते हुए कहा कि वाशर मैन समय पर चादर कबल धोकर नहीं देता है इसलिए चादर, कबल मरीजों को उपलब्ध नहीं हो पाया है। जबकि हरेक वार्ड में बोर्ड लगा हुआ है, उसमें दर्शाया गया है कि प्रत्येक दिन अलग अलग रंग के चादर बेड पर दिया जायेगा। इधर महिला सर्जिकल वार्ड के भर्ती मरीज के परिजनों ने बताया कि दिन के 2 बजे से 6 बजे शाम तक बिजली रोज कट जाती है और मरीजों को अंधेरे मे रहना पड़ता है। 

बहरहाल, जैसी स्थिति में यहां मरीज रहते हैं, उसे देखरकर यही कहा जा सकता है कि अस्पताल प्रशासन की व्यवस्था सिर्फ कागज मे ही दिखाई देता है। जमीन हकीकत आप खुद देख सकते है।


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