कोरोना घोटाले पर नीतीश सरकार पर तेजस्वी का बड़ा आरोप - यह सारा मामला आंकड़ों के 'अमृत' मंथन का है

कोरोना घोटाले पर नीतीश सरकार पर तेजस्वी का बड़ा आरोप - यह सारा मामला आंकड़ों के 'अमृत' मंथन का है

पटना। बिहार में कोरोना घोटाले को लेकर विपक्ष का हमला तेज होता जा रहा है। अब नेता प्रतिपक्ष ने नीतीश सरकार  और उनके अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। तेजस्वी ने कहा कि जो बिहार कोरोना टेस्टिंग में देश में सबसे पीछे था, वह अचानक कुछ दिनों से सबसे ऊपर कैसै आ गया। कैसे कुछ दिनों में जांच एक लाख के आंकड़े को पार करन लगी। तेजस्वी ने कहा यह सारा मामला आंकड़ों के 'अमृत' मंथन का है।

अपने ट्विटर हैंडल पर तेजस्वी ने लिखा है कि बिहार में टेस्टिंग की संख्या 4 महीनों तक देश में सबसे कम रही। विपक्ष और जनदबाव में नीतीश जी ने विपदा के बीच ही आंकड़ों की बाज़ीगरी नहीं करने वाले 3 स्वास्थ्य सचिवों को हटा दिया। फिर उन्होंने अपने जांचे-परखे आंकड़ों की बाज़ीगिरी करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों को नियुक्त किया। उसके बाद अगले 3 दिनों में ही टेस्टिंग की संख्या दुगनी हो गई और लगभग 15 दिनों में यह संख्या एक लाख और 25 दिनों में दो लाख तक पहुँच गई। उसी स्वास्थ्य संरचना से मात्र एक महीने से भी कम समय में यह प्रतिदिन जाँच का आँकड़ा इतना गुणा कैसे बढ़ गया? सारा माजरा आँकड़ों के अमृत मंथन का है।

सीएस सहित 5 लोगों पर की गई है कार्रवाई

फिलहाल विपक्ष के आरोपों के बीच मामले में जमुई के सीएस डॉ. विजयेन्द्र सत्यार्थी, डीपीओ सुधांशु लाल सहित पांच लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। बताया जा रहा है कि वहां डीएम की जांच कराया गया था, जिसमें 28 मोबाइल नंबर ऐसे मिले, जिसमें 0000000000 डिजीट वाले नंबर थे। जमुई के अलावा पटना, भागलपुर, शेखपुरा जिले में कोरोना टेस्टिंग में गड़बड़ी की बात कही जा रही है। मामले में नीतीश कुमार पहले ही कह चुके हैं जो भी दोषी मिलेगी, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


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