मुजफ्फरपुर: LN Mishra College में भारतीय ज्ञान परंपरा पर राष्ट्रीय सेमिनार,AI और ज्ञान परंपरा का सामंजस्य जरूरी
मुजफ्फरपुर स्थित एलएन मिश्रा कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट में 'भारतीय ज्ञान परंपरा' पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य शुभारंभ,कार्यक्रम में बीआरएबीयू के कुलपति ने 'वेद और AI' के समन्वय तथा ज्ञान को इनोवेशन से जोड़ने पर दिया जोर
ललित नारायण मिश्र कॉलेज ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट, मुजफ्फरपुर में राष्ट्रीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) द्वारा प्रायोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य शुभारंभ हुआ। "Role and Relevance of Bhartiya Gyan Parampara in Vishal Bharat" (विशाल भारत में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका एवं प्रासंगिकता) विषय पर आयोजित इस सेमिनार का उद्घाटन 5 सितंबर 2026 को शिक्षक दिवस के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन, राष्ट्रीय गीत, राष्ट्रगान एवं विश्वविद्यालय कुलगीत के साथ हुई। इस दौरान डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन को पुष्प अर्पित किए गए तथा अतिथियों को पौधा व शॉल देकर सम्मानित करने के साथ ही स्मारिका का विमोचन भी किया गया।
विशाल भारत के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा और उसके मूल्यों का योगदान
सेमिनार का मुख्य उद्देश्य विशाल भारत की संकल्पना को नई दिशा देना और आर्थिक प्रगति के साथ-साथ नैतिक व सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है। भारतीय ज्ञान परंपरा प्राचीन काल से ही शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण, दर्शन और प्रबंधन का समृद्ध स्रोत रही है। आधुनिक वैश्विक परिदृश्य में आत्मनिर्भर, सशक्त और ज्ञान-आधारित राष्ट्र के निर्माण के लिए इस धरोहर को अपनाना आवश्यक माना गया। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के लिए केवल आर्थिक समृद्धि ही काफी नहीं है, बल्कि नवाचार, नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व को भी समान महत्व देना होगा।
कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र राय का संबोधन: ज्ञान को इनोवेशन और AI से जोड़ने की जरूरत
मुख्य अतिथि बी.आर. अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश चन्द्र राय ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे ऋषियों की दी हुई शिक्षा से विनय, पात्रता, समृद्धि और चरित्र का निर्माण होता है। उन्होंने जोर दिया कि आज की सबसे बड़ी चुनौती केवल सूचना प्राप्त करना नहीं, बल्कि सूचना को ज्ञान में और ज्ञान को विवेक में बदलना है। प्रो. राय ने ज्ञान को इनोवेटिव इकोसिस्टम से जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि हमें 'वेद और AI' तथा 'योग और AI' के बीच सामंजस्य स्थापित करके सामाजिक व आर्थिक समस्याओं का समाधान तलाशना होगा।
मुख्य वक्ता डॉ. राजेशवर कुमार का वक्तव्य: इमोशनल इंटेलिजेंस और औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति
प्रथम तकनीकी सत्र के मुख्य वक्ता डॉ. राजेशवर कुमार (एसोसिएट प्रोफेसर, नालंदा यूनिवर्सिटी) ने कहा कि आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से भी अधिक आवश्यकता भारतीय ज्ञान परंपरा की 'इमोशनल इंटेलिजेंस' की है। उन्होंने 200 वर्षों की औपनिवेशिक मानसिकता और पश्चिमी दृष्टिकोण से बाहर निकलने की अपील की और गांधी जी के 'हिंद स्वराज' का संदर्भ देते हुए बौद्धिक व मानसिक स्वतंत्रता को महत्वपूर्ण बताया। डॉ. कुमार ने स्पष्ट किया कि प्रकृति असंतुलन (जलवायु संकट), मानवीय मूल्यों का क्षरण और बढ़ती हिंसा जैसे वैश्विक संकटों का समाधान भारतीय ज्ञान परंपरा के संयम, सह-अस्तित्व और लोक कल्याण के दृष्टिकोण में ही निहित है।
एनईपी 2020 का महत्व, शोधार्थियों का विमर्श और आभार ज्ञापन
सेमिनार में केंद्रीय विश्वविद्यालय मोतिहारी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अंजनी कुमार श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर प्रकाश डाला। महाविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कुमार शरतेन्दु शेखर ने कहा कि ऐसे आयोजनों से शिक्षाविदों को एक व्यापक दृष्टिकोण मिलता है, जिससे मानवीय मूल्यों पर आधारित आधुनिक समाज बन सके। सत्र के अंत में शोधार्थियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों ने अपने विचार साझा किए। आयोजकों द्वारा सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सेमिनार को नई पीढ़ी तक भारतीय विरासत पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम बताया गया।