अजब परिवहन विभाग की गजब कहानी, कुर्सियां बड़ी रे बेदर्दी... कुछ पर मेहरबानी तो कुछ पर तिरछी नजर तानी... साहेब करते रहते हैं खेला
बिहार में परिवहन विभाग की अजब गजब कारस्तानी आए दिन निकलकर सामने आती है. ऐसे ही मामलों में कुछ अधिकारियों पर मेहरबानी और कुछ पर बेरुखी का अजब मामला प्रतीत होता है
Bihar Transport : हे साहेब जी! आपके एक्शन पर रिएक्शन होता क्यों है जी! एक बात जानते हैं........चुकी आपका काम हीं ऐसा होता है जिसमें चमड़े के जूते वाली दुर्गन्ध नहीं आती बल्कि चांदी के जूते वाली सुगंध आती है। इसका सुगंध इतना मदमस्त कर देता है कि सारी इन्द्रियां काम करना बंद कर देती है। पर्दा है पर्दा सुने हैं न ई वाला गाना...एकदम से उसी में आप तर बतर हो जाते हैं। लेकिन जो तर बतर होते हैं न उसकी चटर पटर वाली आवाज बाहर आ जाती है। खैर का कीजियेगा! आपके डिपार्मेंट के अपार्टमेंट में कई छेद है जी। कौनो आप थोड़े कर दिए हैं !
यहां ऊपर से नीचे तक जो भी बैठा है उ भ्रष्टाचार का ड्रिलिंग मशीन लेकर बैठा है। मतलब अनगिनत छेद पहले से हीं कर के रखा है। आप थोड़े बंद करने का ठीकेदारी लेकर आए हैं....उसी छेद के भेद में से जो कुछ निकले आप भी मजा मारते रहिए.। चुकी ई वाला नारा कईसे फिट बैठेगा।...... बिहार में बहार है विभाग में भ्रष्टचार बना सदाचार है!...... नीतीशे कुमार हैं.....सुशासन का भट्टा बैठा देना है हुजूर!
कुर्सियां बड़ी रे बेदर्दी....
का कीजियेगा ई विभगवा के कुछ कुर्सियां बड़ी बेदर्दी है। उसको जनता का पैसा लगता है न कि ई हमारे बाप का माल है..! चुकी पर्दा है पर्दा....चलते रहता है...।...सबको अपने रंग में रंग लेता है। होली आने वाला है।...उससे ठीक पहले भ्रष्टाचार सदाबहार वाला बम आपने फोड़ दिया और उसके रंग में गए आधा दर्जन से ज्यादा छोटका साहेब। ई छोटका साहेब क्लर्क से तानी सान ऊपर रहता है..
माल पर ताल बजा...
लेकिन सवाल तो उठ जाता है न कि जो पहले से हीं जगह जगह बैठकर माल पर ताल ठोक रहा है उसी पर आपके द्वारा कुछ ज्यादा मेहरबानी भ्रष्टाचार की एक अलग कहानी का बाजा बजा देता है.।अब हमलोग ठहरे कलमकार आप ठहरे सुशासन का बाजा बजाने वाला कलाकार...लेकिन ले रहे हैं कुर्सी के नीचे से मुद्रा वाला आहार...तब फर्ज तो बनता है कि आपका भी बाजा बजाया जाय....ख्याल रखियेगा हुजूर.....ई कलमकार के कलम रूपी हरमुनिया का सिर सा और रे वाला तान है कुछ और पता करने की कोशिश जारी है....प ध नि सा...होते देर नहीं लगेगा.
धीरज पराशर की रिपोर्ट