Bankipur Bypoll: बांकीपुर का रण गरम, BJP उम्मीदवार अभिषेक का आज नामांकन, नितिन नवीन भी रहेंगे मौजूद, RJD की रेखा गुप्ता भी दाखिल करेंगी नामांकन

Bankipur Bypoll: पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का सियासी अखाड़ा पूरी तरह सज चुका है। ....

Bankipur Bypoll Heats Up BJP RJD Candidates File Nominations
बांकीपुर उपचुनाव - फोटो : social Media

Bankipur Bypoll:  पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव का सियासी अखाड़ा पूरी तरह सज चुका है। सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी ताकत दिखाने में जुटे हैं। गुरुवार को बीजेपी उम्मीदवार अभिषेक कुमार उर्फ बंटी नामांकन दाखिल करेंगे। उनके नामांकन को शक्ति प्रदर्शन में बदलने की तैयारी है। इस मौके पर बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी मौजूद रहेंगे। वह सुबह पटना पहुंचेंगे और नामांकन कार्यक्रम में शामिल होकर कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाएंगे।

नामांकन से पहले अभिषेक कुमार महावीर मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद समाहरणालय पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल करेंगे और फिर समर्थकों को संबोधित करते हुए एक जनसभा भी करेंगे। दूसरी ओर राष्ट्रीय जनता दल ने रेखा कुमारी गुप्ता को चुनावी मैदान में उतारा है। वह भी गांधी मैदान स्थित समाहरणालय में अपना नामांकन दाखिल करेंगी। हालांकि, उनकी उम्मीदवारी को लेकर राजद के भीतर ही इख्तिलाफ और खींचतान खुलकर सामने आने लगी है। सियासी गलियारों में यह चर्चा भी तेज़ है कि इस फैसले से कांग्रेस खेमे में भी नाराज़गी और बेचैनी है।

यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद खाली हुई है। 13 जुलाई तक नामांकन की प्रक्रिया चलेगी, जबकि 30 जुलाई को मतदान और 3 अगस्त को नतीजों का ऐलान होगा। ऐसे में सभी दलों ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है।

उधर, जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर 11 जुलाई को नामांकन दाखिल करेंगे। वह लगातार पदयात्रा और जनसंपर्क अभियान के जरिए मतदाताओं तक पहुंच रहे हैं। बुधवार को उन्होंने वार्ड 35 और 29 में लोगों से मुलाकात की और चिरैयाटांड़ दुर्गा मंदिर से अपनी पदयात्रा की शुरुआत की।

इसी बीच जन सुराज को बड़ा सियासी झटका भी लगा है। पार्टी नेता बिट्टू सिंह ने इस्तीफा देकर बीजेपी को समर्थन देने का एलान कर दिया है। उन्होंने बांकीपुर उपचुनाव में बीजेपी उम्मीदवार के पक्ष में प्रचार करने की घोषणा की है। ऐसे में बांकीपुर का यह उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं, बल्कि सियासी साख, संगठन की ताकत और जनाधार की असली परीक्षा बनता जा रहा है।