Aadhaar for children: बच्चों के आधार से जुड़ी बड़ी खबर! अब मुफ्त में अपडेट होगा बाल आधार कार्ड, जानें तरीका

Aadhaar for children: पांच और 15 वर्ष की उम्र पार करने के बाद बच्चों के लिए यूआईडीएआई ने एक साल की अवधि तक बायोमेट्रिक अपडेट को पूरी तरह निःशुल्क कर दिया है।...

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अब मुफ्त में अपडेट होगा बाल आधार कार्ड- फोटो : social Media

Aadhaar for children: देश की प्रशासनिक सियासत में आधार एक बार फिर केंद्र में है। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) ने दावा किया है कि देश भर के 83 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले एक करोड़ से अधिक स्कूली बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इसे सरकार की डिजिटल गवर्नेंस और सामाजिक योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुंचाने की बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है।  “आधार के ज़रिये व्यवस्था पर पकड़ मजबूत करने” की कवायद भी कहा जा रहा है।

यूआईडीएआई के आधिकारिक बयान के मुताबिक, पांच साल से कम उम्र के बच्चों का आधार नामांकन तो पहले से हो रहा है, लेकिन इस उम्र में बच्चों के फिंगरप्रिंट और आइरिस बायोमेट्रिक्स नहीं लिए जाते। इसकी वजह यह है कि इस आयु में ये पहचान चिन्ह पूरी तरह विकसित नहीं होते। ऐसे में पांच और 15 वर्ष की उम्र पार करने के बाद बच्चों के लिए अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट कराना कानूनन जरूरी कर दिया गया है।

सरकारी तंत्र का साफ संदेश है एमबीयू नहीं कराया तो आगे मुश्किलें तय हैं। चाहे सरकारी योजनाओं का लाभ हो, छात्रवृत्ति का मामला हो या फिर प्रतियोगी और विश्वविद्यालय स्तर की परीक्षाओं में पंजीकरण, आधार अपडेट न होने पर रास्ते में रोड़े अटक सकते हैं। यही वजह है कि सरकार और यूआईडीएआई ने स्कूलों को इस मुहिम का सबसे मजबूत हथियार बनाया।

बयान में बताया गया है कि सात से 15 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए यूआईडीएआई ने एक अक्टूबर से एक साल की अवधि तक बायोमेट्रिक अपडेट को पूरी तरह निःशुल्क कर दिया है। सियासी नजरिए से देखें तो यह कदम आम जनता, खासकर मध्यम और गरीब तबके को राहत देने वाला माना जा रहा है। विपक्ष जहां अक्सर आधार को लेकर सवाल खड़े करता रहा है, वहीं सरकार इसे पारदर्शिता और फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने का कारगर औजार बता रही है।

यूआईडीएआई का कहना है कि स्कूलों में ही बायोमेट्रिक अपडेट की व्यवस्था करने से अभिभावकों की परेशानी कम हुई और बच्चों का कवरेज तेजी से बढ़ा। डिजिटल इंडिया की इस मुहिम में शिक्षा संस्थानों की भागीदारी को सरकार अपनी बड़ी जीत के तौर पर पेश कर रही है।

आधार की दुनिया में अगर एक भी कड़ी कमजोर पड़ी, तो आगे चलकर पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ जाता है। खासकर बच्चों के आधार को लेकर लापरवाही करना कई बार माता-पिता को भारी पड़ सकता है। इस पूरी प्रक्रिया में सबसे पहली और सबसे अहम शर्त है माता-पिता का आधार कार्ड। अगर बच्चा पांच साल से कम उम्र का है, तो कम से कम एक माता-पिता या कानूनी अभिभावक का आधार होना ज़रूरी है। कानून की नजर में मां या पिता में से किसी एक का आधार काफी है, वही बच्चे के आधार से लिंक किया जाता है। आम तौर पर मां के आधार से लिंकिंग की जाती है, लेकिन यह कोई सख्त नियम नहीं है।

दूसरा स्टेप सबसे ज्यादा गड़बड़ी वाला माना जाता है। यहीं से फाइलें उलझती हैं और लोग चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। UIDAI दो ही चीजें मांगता है बच्चे की पहचान और बच्चे व माता-पिता के रिश्ते का सबूत। ज्यादातर मामलों में बर्थ सर्टिफिकेट ही सबसे पुख्ता दस्तावेज माना जाता है। खासकर 1 अक्टूबर 2023 के बाद जन्मे बच्चों के लिए तो बर्थ सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दिया गया है। अगर यह कागज नहीं है, तो UIDAI द्वारा मान्य दूसरे दस्तावेज लगाए जा सकते हैं, लेकिन जानकारों की राय साफ है—पहले जन्म प्रमाण पत्र बनवाइए, वरना आगे चलकर परेशानी तय है।

तीसरा मोर्चा सही आधार एनरोलमेंट सेंटर चुनने का है। छोटे बच्चे को लेकर लंबी लाइन में खड़ा होना किसी सजा से कम नहीं। इसलिए पहले से तय कर लेना बेहतर है कि नजदीकी आधार सेवा केंद्र, सरकारी अस्पताल या स्कूल में सुविधा उपलब्ध है या नहीं। UIDAI का भुवन पोर्टल आसपास के सेंटर और उनकी टाइमिंग की पूरी जानकारी देता है, जिससे अनावश्यक भागदौड़ से बचा जा सकता है।

सेंटर पर पहुंचते ही प्रक्रिया ज्यादा पेचीदा नहीं होती। ऑपरेटर बच्चे की बेसिक जानकारी दर्ज करता है, फोटो खींची जाती है और आवेदन को माता-पिता के आधार से लिंक कर दिया जाता है। राहत की बात यह है कि न तो मोबाइल नंबर देना अनिवार्य है और न ही एक भी रुपया फीस के तौर पर लिया जाता है—पूरी प्रक्रिया मुफ्त है।

आखिरी लेकिन सबसे अहम स्टेप पांच साल की उम्र में आता है। जैसे ही बच्चा पांच साल का होता है, उसका फोटो, फिंगरप्रिंट और आइरिस स्कैन पहली बार पूरे तौर पर लिया जाता है। आधार नंबर वही रहता है, इसे नया आधार नहीं माना जाता।

कुल मिलाकर, आधार बायोमेट्रिक अपडेट अब सिर्फ तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक योजनाओं, शिक्षा और सरकारी लाभों से सीधे जुड़ा सियासी मुद्दा बन चुका है। मुफ़्त एमबीयू की घोषणा के साथ सरकार ने साफ कर दिया है कि आधार की इस लड़ाई में पीछे हटने का सवाल ही नहीं है।