Bihar Congress Party Fund: बिहार में कांग्रेस का संगठन सृजन या सियासी बोझ? जिलाध्यक्ष बनने को 1500 सदस्य और मोटी रकम की शर्त से उठे सवाल
ndian National Congress : कांग्रेस में इन दिनों संगठन सृजन के नाम पर नई सियासी हलचल तेज है। ...
Indian National Congress : कांग्रेस में इन दिनों संगठन सृजन के नाम पर नई सियासी हलचल तेज है। देशभर में जिलाध्यक्षों की तैनाती की प्रक्रिया जारी है, लेकिन बिहार में तय किया गया क्राइटेरिया पार्टी के अंदर ही विरोध और बेचैनी का सबब बनता दिख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, कई नेता और जमीनी कार्यकर्ता इस नई शर्त से नाखुश हैं, मगर आलाकमान ने उन्हें पब्लिक प्लेटफॉर्म पर बयानबाज़ी से परहेज करने की हिदायत दी है।
दरअसल, बिहार में जिलाध्यक्ष बनने की ख्वाहिश रखने वाले किसी भी दावेदार को पहले कम से कम 1500 सृजन साथी बनाना अनिवार्य किया गया है। इतना ही नहीं, हर सृजन साथी से 50 रुपये सदस्यता शुल्क भी वसूलना होगा। यानी जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी से पहले ही हजारों रुपये का इंतज़ाम करना पड़ेगा।
इसी तर्ज़ पर अगर कोई ब्लॉक अध्यक्ष बनना चाहता है तो उसे 200 सदस्य जोड़ने होंगे और हर सदस्य से 50 रुपये जमा कराने होंगे। साफ़ है कि ब्लॉक अध्यक्ष पद के इच्छुक को कम से कम 10 हजार रुपये की व्यवस्था करनी होगी। प्रदेश स्तर पर उपाध्यक्ष बनने के लिए 1500 सदस्य और महासचिव बनने के लिए 1000 सदस्य बनाने की शर्त रखी गई है।
बिहार जैसे सूबे में, जहां पार्टी कई दशकों से सत्ता से बाहर है और हालिया विधानसभा चुनाव में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल पहले से ही टूटा हुआ है, वहां इतनी सख्त आर्थिक और सदस्यता शर्तें कई लोगों को अव्यावहारिक लग रही हैं। कुछ नेताओं का कहना है कि जब आम सदस्यता शुल्क 5 रुपये है, तो “सृजन साथी” के नाम पर 50 रुपये लेना गैरज़रूरी बोझ है।
सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या संगठन को मज़बूत करने की यह कवायद ज़मीनी हक़ीक़त से मेल खाती है या फिर यह शर्तें सियासी दावेदारों के लिए नई रुकावट बन जाएंगी? फिलहाल, पार्टी के अंदर खामोश नाराज़गी है, मगर आने वाले दिनों में यह मुद्दा सियासी बहस का बड़ा विषय बन सकता है।