Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट चुनाव में दिग्गजों में टकराव! 29 कुर्सियां और 110 दावेदार, जानें मैदान में कौन-कौन?
Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन के चुनाव में इस बार जबरदस्त भिड़ंत देखने को मिलने वाली है। 29 पदों के लिए 110 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है।
Patna High Court News: पटना हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। 17 अप्रैल को होने वाले इस मतदान के लिए उम्मीदवारों की अंतिम सूची हो गई है। इस बार 29 पदों के लिए मुकाबला होना है। इन पदों पर अध्यक्ष, महासचिव और उपाध्यक्ष जैसे पदों पर जबरदस्त मुकाबला होगा। बता दें कि 29 पदों के लिए 101 उम्मीदवार मैदान में हैं।
अध्यक्ष पद के लिए मैदान में 7 प्रत्याशी
अध्यक्ष पद के लिए 7 प्रत्याशी मैदान में हैं। जिसमें वरीय अधिवक्ता योगेश चंद्र वर्मा, राजेंद्र नारायण, रबिंद्र कुमार चौबे, अरुण कुमार, प्रेम प्रकाश आर्या, शैलेंद्र कुमार सिंह और हरेंद्र प्रताप सिंह शामिल हैं। इन उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होने की संभावना जताई जा रही है। उपाध्यक्ष के बाद 3 पदों के लिए 25 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं। मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है।
ये उम्मीदवार आजमा रहे अपनी किस्मत
वहीं महासचिव के पद के लिए 13 प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। जिनमें संजीव कुमार मिश्रा, मनोहर प्रसाद सिंह, पुरुषोत्तम कुमार दास, मणिकांत मिश्रा, जयशंकर प्रसाद सिंह, विनोद कुमार, राकेश कुमार सिन्हा, राम संदेश राय, राजेश कुमार मिश्रा, राजकुमार राजेश, प्रेम कुमार पासवान, सरोज कुमार और राजीव कुमार शामिल हैं। सहायक सचिव के 3 पदों के लिए 12 उम्मीदवार मैदान में हैं। जबकि संयुक्त सचिव के 3 पदों पर 15 दावेदार चुनाव लड़ रहे हैं। कोषाध्यक्ष के एक पद के लिए पुष्पा सिन्हा और सुजाता सिन्हा के बीच सीधा मुकाबला होगा।
29 पदों के लिए 101 उम्मीदवार
वरीय कार्यकारिणी के 5 पदों के लिए 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा कार्यकारिणी सदस्य के 7 पदों के लिए 19 उम्मीदवार, निगरानी समिति के 3 पदों के लिए 5 उम्मीदवार और ऑडिटर के 2 पदों के लिए डॉ. मनोज कुमार एवं संजय कुमार आमने-सामने हैं। इस बीच लाइब्रेरी समिति के पद पर अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। एसोसिएशन के इस चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि नई कार्यकारिणी पर अधिवक्ताओं के कल्याण, सुविधाओं में सुधार और कोर्ट परिसर की व्यवस्थाओं को मजबूत करने की बड़ी जिम्मेदारी होगी।