कौन साबित होगा जमुई और चकाई का अर्जुन, अजय-विजय के चक्कर मे चूक सकता है गोल्डन गर्ल का निशाना

कौन साबित होगा जमुई और चकाई का अर्जुन, अजय-विजय के चक्कर मे चूक सकता है गोल्डन गर्ल का निशाना

जमुई... कोरोना संकट काल में हो रहे बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के प्रथम चरण में जमुई जिला के चार विधानसभा क्षेत्रों में जमुई के मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर अपने प्रतिनिधि को चुनने का काम करेंगे। परिणाम क्या होगा जमुई की जनता किसको अपना प्रतिनिधि चुनती है इस बात का खुलासा तो 10 नवंबर को मतगणना के बाद ही पता चल पाएगा, लेकिन राजनीति पंडितों की नजरें टिकी है जमुई पर। कारण कि यहां की दो विधानसभा क्षेत्र हॉट सीट बन चुकी है। इन दो हॉट सीटों में फंसी है। तीन राजनीतिक घरानों की प्रतिष्ठा और इन दोनों विधानसभा क्षेत्रों में रची गई चुनावी चक्रव्यूह को तोड़ने वाला कौन बनेगा अर्जुन इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाओं से जिले का राजनीतिक तापमान कभी बढ़ता है तो कभी घट भी जाता है।

जमुई जिला के दो विधानसभा क्षेत्र हैं, चकाई और जमुई जिसको लेकर चर्चा चहुंओर है। इन दोनों क्षेत्रों में प्रदेश और देश के राजनेताओं द्वारा इस तरह के चक्रव्यूह की रचना की गई कि मतदाता उस अर्जुन की तलाश में लगी है जो इस चुनावी चक्रव्यूह को तोड़ सकता है।


सबसे पहले बात करते हैं झारखंड राज्य से सटे चकाई विधानसभा क्षेत्र की जहां अब तक 14 बार हुए विधानसभा चुनाव में 7 बार एक ही परिवार के पिता-पुत्र ने बाजी मारी है। 1962 और 1972 को छोड़कर चकाई विधानसभा क्षेत्र में दो ही परिवार का दबदबा रहा है और वो परिवार है पूर्व कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह और बीजेपी नेता फाल्गुनी प्रसाद यादव का। वर्तमान में फाल्गुनी प्रसाद यादव की पत्नी सावित्री देवी आरजेडी से वर्तमान विधायक हैं और इस बार भी आरजेडी के टिकट पर चुनाव भी लड़ रही हैं।

वहीं बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के पुत्र व पूर्व विधायक सुमित कुमार सिंह को एक बार फिर चकाई के चक्रव्यूह में फंसाने की को कोशिश की गई। सुमित इस चक्रव्यूह को तोड़ने में कितने सफल होंगे ये तो दिगर की बात है लेकिन जो खबरें छन कर आ रही है वो ये है कि पूर्व विधायक सुमित इस बार अभिमन्यू की भूमिका में नहीं बल्कि अर्जुन की भूमिका में नजर आएंगे।

जमुई जिले का चकाई ही एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है, जहां 14 बार हुए विधानसभा चुनाव में 7 बार पिता-पुत्र की जोड़ी ने अपने विरोधियों को शिकस्त दी है और विधानसभा की चैखट को पार किया है।

 चकाई विधानसभा क्षेत्र में समाजवादी नेता श्रीकृष्ण सिंह ने यह परंपरा 1967 से प्रारंभ की। 1969 में हुए विधानसभा चुनाव में भी श्रीकृष्ण सिंह ने जीत दर्ज कर चकाई की समस्याओं को लेकर विधानसभा में अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने न केवल चकाई का बल्कि जमुई में कई ऐसे कामों को अंजाम दिया जिसकी चर्चा आज भी होती है। उनके बाद उनके पुत्र व बिहार सरकार के पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह को चकाई की जनता ने तीन बार चकाई से विधानसभा भेजने का काम किया। 1985 में कॉग्रेस के टिकट पर पहली बार बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह के आशीर्वाद से नरेन्द्र सिंह विधायक चुने गए। 1990 में भी नरेन्द्र सिंह का जलवा बरकरार रहा लेकिन 1995 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार फाल्गुनी प्रसाद यादव से उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। लेकिन फिर 2000 के चुनाव में नरेन्द्र सिंह ने अपनी कड़ी मेहनत की बदौलत नरेन्द्र सिंह ने एक बार फिर चकाई से अपनी जीत का परचम लहराया।


इसके बाद पूर्व मंत्री नरेन्द्र सिंह के पुत्र ने संभाली चकाई की कमान। 2005 के फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव में नरेन्द्र सिंह के पुत्र स्व. अभय सिंह ने चकाई से जीत दर्ज की। लेकिन 2005 के अक्टूबर में हुए विधानसभा चुनाव में उन्हें बीजेपी के फाल्गुनी प्रसाद यादव से हार का सामना करना पड़ा। फिर 2010 के चुनाव में नरेन्द्र सिंह के एक और पुत्र सुमित कुमार सिंह ने चकाई में अपना झंडा गाड़ा और जेएमएम के टिकट पर पहली बार चुनाव जीतकर विधानसभा की चैखट को पार किया। 2015 के चुनाव में सुमित कुमार सिंह को बीजेपी नेता स्व. फाल्गुनी प्रसाद यादव की पत्नी सावित्री देवी से हार का समना करना पड़ा।  2015 के चुनाव में बीजेपी और हम के बीच हुए गठबंधन के कारण सुमित कुमार सिंह हम के टिकट पर चुनाव लड़े और सावित्री देवी ने बीजेपी से टिकट न मिलने पर आरजेडी का दामन थाम कर चुनाव में जीत हासिल की।

वहीं अगर जमुई विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो यहां भी अंतर्राष्ट्रीय स्तर की निशानेबाज गोल्डन गर्ल के नाम से मशहूर पूर्व केन्द्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह की पुत्री श्रेयसी सिंह का मामला अजय और विजय के चक्कर में फंसता नजर आ रहा है।      

 अब तक के चुनावों में किसकी हुई जीत 

1962                  लखन मुर्मु                      सोशलिस्ट पार्टी

1967                 श्री कृष्ण सिंह                  संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी

1969                 श्री कृष्ण सिंह                  संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी

1972                 चंद्रशेखर सिंह                 कॉग्रेस

1977                फाल्गुनी प्रसाद यादव        निर्दलीय

1980                फाल्गुनी प्रसाद यादव       बीजेपी

1985                नरेन्द्र सिंह                      कॉग्रेस

1990                नरेन्द्र सिंह                      जनता दल

1995                फाल्गुनी प्रसाद यादव      बीजेपी

2000                नरेन्द्र सिह                     निर्दलीय

2005(थ्म्ठ)       अभय सिंह                      लोजपा

2005(व्ब्ज्)       फाल्गुनी प्रसाद यादव       बीजेपी

2010              सुमित कुमार सिंह           जेएमएम

2015               सावित्री देवी                  आरजेडी



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