23 साल बाद सम्राट अशोक की 2300 साल पुरानी शिलालेख को मिली कब्जे से मुक्ति, पुरातत्व विभाग को सौंपी गई चाबी

23  साल बाद सम्राट अशोक की 2300 साल पुरानी शिलालेख को मिली कब्जे से मुक्ति, पुरातत्व विभाग को सौंपी गई चाबी

SASARAM : 23 साल बाद सम्राट अशोक से जुड़े बिहार के इकलौते 2300 साल पुराने शिलालेख को आखिरकार अतिक्रमण से मुक्त करा दिया गया है। ASI के अधिकारियों को मंगलवार को इसकी चाबी सौंप दी गई है। 

बता दें कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के संरक्षित स्मारक को अतिक्रमण कर मजार बना दिया गया था। इस पर चादर चढ़ाई जाती थी। इतना ही नहीं शिलालेख पर चूना लगाकर इसे नष्ट करने की कोशिश भी की गई। शिलालेख को कब्जे से मुक्त कराने के पहले भी प्रयास किए गए, लेकिन कामयाबी नहीं मिल पा रही थी। लेकिन पिछले दो माह से इसे कब्जे से मुक्त कराने के लिए प्रशासन पर लगातार दबाव बना हुआ था। 

पुरातत्व विभाग के इस संरक्षित स्थल पर लगाए गए बोर्ड को भी अतिक्रमणकारियों ने उखाड़ कर फेंक दिया था। यहां तक कि शिलालेख पर चुना पोतकर कर उसे नष्ट करने की भी कोशिश की गई। इस ऐतिहासिक शिलालेख के आगे लोहे का गेट लगा दिया गया था। पुरातत्व द्वारा बार-बार मांगने पर भी उसकी चाबी नहीं दी जा रही थी। कई बार विभाग ने जिला प्रशासन को इसके लिए लिखा, लेकिन शिलालेख मुक्त नहीं हो सका था।

चंदन पहाड़ी पर बने शिलालेख को लेकर जानकार बताते हैं कि कलिंग युद्ध के बाद जब सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म अपना लिया और देश और दुनिया में बौद्ध धर्म के प्रचार प्रसार करने लगे। उसी दौरान सारनाथ की ओर जाने के क्रम में सम्राट अशोक इसी चंदन पहाड़ी के पास रुके थे। अपने धर्म प्रचार के 256 दिन पूरे होने पर यह शिलालेख चंदन पहाड़ी पर लिखा गया था। इस तरह के लघु शिलालेख सासाराम के अलावा उत्तर प्रदेश एवं कैमूर जिला में भी है। जिसमें बौद्ध धर्म के प्रचार के संबंध में शिलालेख अंकित किया गया है।


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