बिहार में नगर निकाय का चुनाव टलने के बाद भाजपा ने विरोधियों पर बोला हमला, कहा- 'कर्पूरी जी को गाली देने वाले का चेहरा बेनकाब होना चाहिए'

बिहार में नगर निकाय का चुनाव टलने के बाद भाजपा ने विरोधियों पर बोला हमला, कहा- 'कर्पूरी जी को गाली देने वाले का चेहरा बेनकाब होना चाहिए'

पटना. बिहार में नगर निकाय का चुनाव टल गया है। इस पर बिहार में सियासत शुरू हो गयी है। भजापा और जदयू नेता आमने सामने हैं। भाजपा नेता इसके लिए सीएम नीतीश को जिम्मेदार मान रहे हैं, तो जदयू नेता भी बीजेपी पर पलटवार करने से चुक नहीं रहे हैं। दरअसल, निगर निकाय के चुनाव में ईबीसी आरक्षण पर पटना हाईकोर्ट के फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 और 20 अक्टूबर को होने वाले चुनाव को स्थगित कर दिया है।

यह चुनाव स्थगित होने के बाद ही भाजपा और जदयू के नेता सियासी जंग में उतर गये हैं। इसको लेकर भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने विरोधियों पर हमला बोलते हुए कहा, 'कर्पूरी ठाकुर जी ने जब आरक्षण लागू किया तो जनसंघ मजबूती से साथ खड़ी थी। तब कर्पूरीजी को.....गाली देने, कुर्ता फाड़ने, कपटी ठाकुर बोलने वाले, आरक्षण नीति के खिलाफ पर्चा छपाकर बांटने वाले, उपरोक्त भूमिका में रहे लोग आज राजनीतिक सहभागी हैं। इन सबका चेहरा बेनकाब होना चाहिए।'

वहीं हाईकोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कल उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट किया था, 'बिहार में चल रहे नगर निकायों के चुनाव में अतिपिछड़ा आरक्षण को रद्द करने एवं तत्काल चुनाव रोकने का उच्च न्यायालय का फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा निर्णय केन्द्र सरकार और भाजपा की गहरी साज़िश का परिणाम है। अगर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने समय पर जातीय जनगणना करावाकर आवश्यक संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी कर ली होती तो आज ऐसी स्थिति नहीं आती।'

सीएम नीतीश अति पिछड़ा विरोधी- भाजपा

इस पर बीजेपी प्रवक्ता ने भी पलटवार किया था। भाजपा प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा मख्यमंत्री नीतीश कुमार पिछड़ा अति पिछड़ा समाज के घोर विरोधी हैं। यह लोग सिर्फ ओबीसी को वोट बैंक समझते हैं। बिहार BJP के प्रवक्ता निखिल आनंद ने CM नीतीश को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि यह बात स्पष्ट हो गया है नगर निकाय चुनाव का इन लोगों ने मजाक उड़ा कर रख दिया है। साथ ही साथ पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज का मजाक उड़ाया है। इसके लिए बिहार की जनता ओबीसी इबीसी समाज माफ नहीं करेगी।

नगर निकाय चुनाव में EBC आरक्षण पर फैसला

पटना हाईकोर्ट ने बिहार के पिछड़ा वर्गों को आरक्षण दिए जाने के मुद्दे पर कल निर्णय सुनाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रावधानों के अनुसार तब तक स्थानीय निकायों में ईबीसी के लिए आरक्षण की अनुमति नहीं दी जा सकती, जब तक सरकार 2010 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित तीन जांच अर्हताएं नहीं पूरी कर लेती। 19 नगर निगमों में नौ जगहों पर महिला और उप महापौर महिलाओं के लिए आरक्षित किया गया था, जबकि अनुसूचित जाति के लिए गया नगर निगम और समस्तीपुर नगर निगम में महापौर और उप महापौर का पद आरक्षित किया गया था। अति पिछड़ा वर्ग के लिए महापौर के तीन पद आरक्षित किये गये थे। इनमें बिहारशरीफ, भागलपुर और मुजफ्फरपुर की महापौर व उप महापौर पद के लिए पटना नगर निगम, भागलपुर और मुजफ्फरपुर नगर निगम के पद आरक्षित किये गये थे।


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