दो साल बाद आज से फिर गूंजेगी बोलबम की गूंज, श्रावणी मेले का उद्घाटन आज, अजगैबीनाथ में उभड़ी कांवड़ियों की भीड़

दो साल बाद आज से फिर गूंजेगी बोलबम की गूंज, श्रावणी मेले का उद्घाटन आज, अजगैबीनाथ में उभड़ी कांवड़ियों की भीड़

BHAGALPUR/DEOGHAR : दो साल बाद आज एक बार फिर श्रावणी मेला विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2022 (World Famous Shravani Mela 2022)  शुरू हो रहा है। जिसको लेकर भागलपुर के अजगैबीनाथ धाम में कांवड़ियों की भारी भीड़ जमा हो गई है। वातावरण में अभी से ही बोलबम के नारे गूंजने लगे हैं। अजगैबीनाथ धाम में उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद सिंह मेले का उद्घाटन करेंगे. मेले के उद्घाटन को लेकर सारी तैयारियां पूरी कर ली गई है।

इससे पहले बुधवार की शाम जिला पदाधिकारी सुब्रत कुमार सेन (Bhagalpur DM Subrata Kumar Sen), एसएसपी बाबुराम, डीडीसी प्रतिभा रानी, एसडीओ धन्नजय कुमार समेत जिला और प्रखंड के अधिकारियों के साथ मेला क्षेत्र का निरक्षण किया था। जिलाधिकारी ने बताया कि श्रावणी मेले का उद्घाटन जहाज घाट में शाम 4 बजे किया जाएगा।  इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय करेंगे। इस समारोह में पर्यटन मंत्री नारायण प्रसाद, उद्योग मंत्री सैयद शाहनवाज हुसैन, स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेट, जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन, पंचायतीराज मंत्रई सम्राट चौधरी, कला एवं संस्कृति मंत्री आलोक रंजन समेत अन्य कई विधायक और सांसद शामिल होंगे। 

सुरक्षा के किए गए कड़े प्रबंध

वहीं, मेले के दौरान आनेवाली लाखों की भीड़ की सुरक्षा को लेकर भागलपुर एसएसपी बाबूराम ने बताया कि श्रावणी मेला क्षेत्र में 14 सेंटर बनाये गये हैं, वहीं 6 सहायक थाना बनाए गए हैं। जगह-जगह बेरिंकेटिंग लगाये गये हैं। साथ ही बाहर से आनेवाले बड़े वाहनों को प्रवेश नहीं दिये जाएगें।  शहर के व्यवसाईयों के लिए रात्री में वाहन प्रवेश की अनुमति दी गई है. इस दौरान जिला और प्रखंड के तमाम अधिकारी मौजुद रहे।

कांवरियों के लिए मोबाइल ऐप लॉन्च

झारखंड में बुधवार को ही श्रावणी मेला की शुरुआत हो गई। राज्य के कृषि मंत्री बादल पत्रलेख और बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने बिहार बॉर्डर पर स्थित दुम्मा में मंत्रोच्चार के साथ मेले का उद्घाटन किया। बुधवार को बिहार के पर्यटन विभाग ने कांवर यात्रा 2022 से जुड़ा मोबाइल ऐप भी लॉन्च किया। इसमें कांवरियों से संबंधित सभी जरूरी जानकारी मिलेगी।

सुल्तानगंज से देवघर के बीच 95 किमी का फासला

श्रावणी मेला के दौरान कांवर यात्रा के लिए सुल्तानगंज से देवघर के बीच 95 किलोमीटर लंबा कच्चा कांवरिया पथ बनाया गया है। इस पर गंगा की बालू बिछाई गई है। कांवरियों की सुविधा के लिए नियमित रूप से पानी का छिड़काव किया जाएगा। आम लोगों को कांवरिया पथ पर जाने की इजाजत नहीं होगी। कांवरिये सुल्तानगंज स्टेशन से लेकर असरगंज, मनियामोड़, कुमरसार, जलेबिया, अबरखा, कटोरिया, इनारावरण, गोड़ियारी, कलकतिया और दर्शनिया होते हुए बाबा वैद्यनाथ धाम पहुंचेंगे।

सुल्तानगंज से लिया जाता है गंगा जल

 बिहार का भागलपुर जिला एक ऐतिहासिक स्थल है. यह गंगा नदी के तट पर बसा हुआ है. जहां बाबा अजगैबीनाथ का विश्वप्रसिद्ध प्राचीन मंदिर है. उत्तरवाहिनी गंगा होने के कारण सावन के महीने में लाखों कावड़ियां देश के विभिन्न भागों से गंगाजल लेने के लिए यहीं आते हैं. फिर यह गंगाजल लेकर झारखंड राज्य के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ को चढ़ाने के लिए पैदल ही जाते हैं. बाबा बैद्यनाथ धाम भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में एक माना जाता है. सुल्तानगंज हिन्दू तीर्थ के अलावा बौद्ध पुरावशेषों के लिये भी विख्यात है.

दुम्मा से करते है झारखंड में प्रवेश

 करीब 100 मीटर लंबी पैदल यात्रा के दौरान शिवभक्तों के पैरों में छाले पड़ जाते हैं. लेकिन आस्था के आगे हर कष्ट छोटा नजर आता है. बोल बम के जयघोष के बीच उनका उत्साह बढ़ता जाता है और कदम अपने आप आगे बढ़ता है. शिव के दर्शन की इच्छा सभी कष्टों को भुला देती है. सभी श्रद्धालु दुम्मा में विशाल गेट से झारखंड में प्रवेश करते हैं और करीब 17 किलोमीटर चलकर बाबा भोलेनाथ की शरण में पहुंच जाते हैं। गोड़ियारी से कलकतिया और दर्शनिया होते हुए बाबा धाम जाने का रास्ता है। यहां पहुंचकर बाबा धाम के शिवगंगा में श्रद्धालु स्नान करते हैं, जो शुभ माना जाता है. लिहाजा शिवभक्त शिवगंगा में स्नान करने के बाद ही शिव के दर्शन करते हैं और जल चढ़ाते हैं. हालांकि इनकी ये यात्रा अभी पूरी नहीं मानी जाती।

बासुकीनाथ में पूरी होती है यात्रा

बाबा धाम में कांवड़ियों की यात्रा पूरी नहीं होती. देवघर के बाद शिवभक्त 45 किलोमीटर दूर दुमका के बासुकीनाथ मंदिर जाते हैं और दूसरे पात्र का जल भगवान शिव को चढ़ाते हैं. मान्यताओं के अनुसार बाबा धाम भगवान शिव का दीवानी दरबार है और बासुकीनाथ मंदिर में भगवान का फौजदारी दरबार लगता है. बासुकीनाथ के दर्शन के बाद ही कांवड़ियों की अलौकिक यात्रा पूरी होती है.


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