उपचुनाव को लेकर अनिल सहनी का दर्द सामने आया! कहा - अनंत सिंह की विधायकी जाने पर पत्नी को टिकट, मुझसे पूछना भी जरुरी नहीं समझा गया

उपचुनाव को लेकर अनिल सहनी का दर्द सामने आया! कहा - अनंत सिंह की विधायकी जाने पर पत्नी को टिकट, मुझसे पूछना भी जरुरी नहीं समझा गया

NEW DELHI : बिहार में कुढ़नी उप चुनाव को लेकर महागठबंधन की तरफ से मौजूदा विधायक या उसके परिवार की जगह जदयू के उम्मीदवार को मौका दिया गया है। जिसको लेकर अब अनिल सहनी की निराशा अब खुलकर सामने आ गई है। अनिल सहनी ने कहा कि मोकामा में अनंत सिंह की सदस्यता समाप्त होने पर उनकी पत्नी को टिकट दिया गया। लेकिन मुझसे किसी ने यह भी नहीं पूछा कि मेरी जगह किसे टिकट दिया जाए। अनिल सहनी ने कहा कि होना यह चाहिए था कि मेरी जगह किसे टिकट दे रहे हैं, कम से कम इस पर मुझसे चर्चा होनी चाहिए थी, लेकिन यह सीट राजद की जगह जदयू को देने का फैसला ले लिया गया।

दिल्ली में न्यूज4नेशन के साथ बातचीत में अनिल सहनी ने कहा कि उप चुनाव को लेकर मैंने कभी भी  अपनी पत्नी या परिवार को किसी सदस्य के लिए टिकट नहीं मांगा। लेकिन एक सच यह भी है कि जैसे अनंत सिंह के जेल जाने पर उनकी पत्नी को चुनाव लड़ाने का फैसला किया गया, मुझसे भी पूछते कि मैं किसे उम्मीदवार बना सकता हूं। यह सीट अति पिछड़ों की है। बड़ी संख्या में मेरे समर्थक हैं, जो यह चाहते थे कि मेरी जगह किसी पिछड़े को ही टिकट मिले। वह मुझसे पूछ रहे हैं कि आखिर राजद की सीट जदयू को क्यों दे दी गई। मेरी कोशिश होगी कि अपने लोगों को समझाएं कि यह पार्टी का फैसला है, वह इसका समर्थन करें।

नहीं जाएंगे पूछने

अनिल सहनी ने कहा अब चूंकि महागठबंधन ने फैसला ले लिया है तो वह न तो लालू प्रसाद और न ही तेजस्वी यादव से यह पूछेंगे कि उनके साथ ऐसा क्यों हुआ। कुढ़नी के पूर्व विधायक ने कहा कि मैं राजद का सदस्य हूं। अगर मुझे कहा जाएगा तो चुनाव प्रचार के लिए जाऊंगा। जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, वह निभाऊंगा। हालांकि यह कहते हुए उनकी निराशा साफ नजर आ रही थी।

चुनाव आयोग ने दिखाई जल्दबाजी

अनिल सहनी ने चुनाव आयोग पर भी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा जुलाई में अनंत सिंह की सदस्यता रद्द की गई, जिसके बाद पांच माह तक उन्हें मौका दिया गया कि वह अपनी बेगुनाही साबित करें। लेकिन मुझे सिर्फ एक माह का समय दिया गया। चुनाव आयोग के फैसले पर अपना मलाल जाहिर करते हुए अनिल सहनी ने कहा कि यह सब इसलिए हुआ कि कुढ़नी से एक पिछड़े को मौका दिया गया था। मामला अभी कोर्ट में है। पांच दिसंबर को फैसला आना है। ऐसे में उन्हें भी चुनाव आयोग से समय मिलना चाहिए था। 


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