बड़ा फ्रॉडः जमीन रजिस्ट्री में बड़े खेल का खुलासा, रजिस्ट्री दफ्तर की मिलीभगत से एक झटके में सरकार को लगाया 8 करोड़ का चूना

बड़ा फ्रॉडः जमीन रजिस्ट्री में बड़े खेल का खुलासा, रजिस्ट्री दफ्तर की मिलीभगत से एक झटके में सरकार को लगाया 8 करोड़ का चूना

PATNA: बिहार में सुशासन राज है। लेकिन इसी सुशासन राज में सरकारी तंत्र की मिलीभगत से लूट मची है। अफसर-माफियाओं के गठजोड़ से सरकारी राशि का घपला जारी है। निबंधन विभाग में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जमीन के निबंधन में करोड़ों रू के राजस्व का चूना लगाया गया है। न्यूज4नेशन के पास वो दस्तावेज हैं जिसके आधार पर पता चला है कि निबंधन विभाग के अफसर-कर्मी और माफियाओं की मिलीभगत से एक दिन में करीब 8 करोड़ की सरकारी राशि का चूना लगाया गया है।इसमें एक बीजेपी नेता का नाम जुड़ रहा है। पूरा मामला क्या है पढ़िए इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में...

एक झटके में लगाया करीब 8 करोड़ का चूना

मामला पूर्वीचंपारण से जुड़ा है। मोतिहारी के निबंधन कार्यालय में 14 मार्च 2020 को विभागीय मिलीभगत से लगभग 8 करोड़ के राजस्व की चोरी की गई है।एक साल बाद यह मामला साामने आया है। इसके बाद हड़कंप मचा है। मामला यूं है कि मोतिहारी निबंधन विभाग में 14 मार्च 2020 को दो दस्तावेजों का निबंधन हुआ। निबंधन में ही खेल कर अधिकारी-माफिया मालोमाल हो गये।मोतिहारी रजिस्ट्री ऑफिस में तुरकौलिया अंचल के मौजा-लक्ष्मीपुर, थाना नंबर-172,  दस्तावेज नंबर 2838-2837 टोकन नंबर 2896 व 2865 से निबंधन हुआ। इसके तहत करीब 1400 डिसमिल जमीन का निबंधन किया गया।


आवासीय भूमि को दो फसला बता लगाया राजस्व का चूना

मोतिहारी शहर से तुरकौलिया जाने वाली स्टेट हाईवे के बगल में 1400 डिसमिल जमीन के निबंधन में ही खेल कर दिया गया। तमाम नियमों को ठेंगा दिखाते हुए जो जमीन आवासीय या व्यावसायिक हो सकती थी उसे दो फसला यानी कृषि भूमि बता कर राजस्व की चोरी की गई। दो फसला बता कर इस जमीन की कीमत सरकारी आंकड़ों में सिर्फ 12 करोड़ 55 लाख 81 हजार रू दिखाया गया। जबकि सरकार की तरफ से जो एमवीआर लागू है उसके अनुसार थाना नंबर-172 मौजा लक्ष्मीपुर का रेट व्यवसायिक का 6 लाख प्रति डिसमिल,रोड़ साइड का 4 लाख प्रति डिसमिल,वासकित जमीन का 2.5 लाख,डेवलपिंग का 2 लाख और सबसे कम दो फसला का 90 हजार रू प्रति डिसमिल सरकारी रेट तय है। यहीं पर विभागीय मिलीभगत से खेल किया गया।

200 मीटर के दायरे में मकान हो तो आवासीय के तौर पर होता है  प्लॉट का निबंधन

निबंधन विभाग के अधिकारी,जमीन जांच करने वाले कर्मी और जमीन क्रेता की मिलीभगत से व्यवसायिक या आवासीय जमीन को दो फसला बता कर प्रति डिसमिल 90 हजार रू की दर से सरकारी राजस्व जमा कराई गई। यहीं पर बड़ा खेल हुआ। जिस जमीन का सरकारी रेट 80-90 करोड़ होना चाहिए था उसे सिर्फ 12 करोड़ 55 लाख 81 हजार रू दिखाया गया और इसी मूल्य पर सरकारी राजस्व जमा कराया गया। इस तरह से करीब 8 करोड़ के राजस्व का सीधे-सीधे नुकसान हुआ है। जबकि उस प्लॉट के बगल में पेट्रोल पंप एवं अन्य आवासीय भवन हैं। जमीन निबंधन में नियम यह है कि अगर जिस जमीन पर खेती होती हो लेकिन उसके 200 मीटर में अगर मकान हो तो उस जमीन को आवासीय मानते हुए निबंधन आवासीय कैटेगरी में होगा। इसके साथ ही कई अन्य गाईडलाइन्स सरकार ने जारी किये हैं। लेकिन सारे नियमों को दरकिनार कर यह बड़ा खेल खेला गया है। 

क्या कहते हैं मोतिहारी के जिला अवर निबंधक


इस बड़े घोटाले की बात सामने आने पर मोतिहारी का जिला अवर निबंधन कार्यालय कटघरे में है। आखिर इतनी बड़े प्लॉट का जब निबंधन हो रहा था पूरे तौर पर जांच क्यों नहीं कराई गई। जब उस जमीन के कुछ दूरी पर पेट्रोल पंप,आईटीआई व अन्य आवासीय और व्यवसायिक प्रतिष्ठान हैं तो फिर 1400 डिसमिल जमीन को दो फसला बता कैसे निबंधन किया गया?  इस संबंध में मोतिहारी के जिला अवर निबंधक विनय कुमार प्रसाद ने कहा कि हां जमीन की रजिस्ट्री तो हुई है। जहां तक राजस्व चोरी की बात है तो सीओ से भी रिपोर्ट मांगी गई है। निबंधक ने दबे स्वर में स्वीकार किया की गड़बड़ी हुई है। उन्होंने आगे कहा कि हमने पूरे मामले को तिरहुत प्रमंडल के AIG को रिपोर्ट भेज दी है। उन्होंने कहा कि प्रमाणित होते ही जरूरत पड़ी तो जमीन नीलाम कर सरकारी राजस्व की वसूली की जायेगी। बताया जाता है कि जिस जमीन का निबंधन में खेल हुआ वो एक  BJP के नेता से जुड़ा है। अगली कड़ी में बतायेंगे कि कैसे सेटिंग कर सरकारी राजस्व की कर ली गई चोरी.

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