पूर्व कानून मंत्री कार्तिक मास्टर को मिली बड़ी राहत, पटना हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

पूर्व कानून मंत्री कार्तिक मास्टर को मिली बड़ी राहत, पटना हाईकोर्ट से मिली अग्रिम जमानत

पटना. नीतीश सरकार के पूर्व कानून मंत्री कार्तिक सिंह को पटना हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. राजद नेता कार्तिक सिंह उर्फ़ मास्टर को अपहरण से जुड़े एक मामले में पटना हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है. बुधवार को इस मामले की सुनवाई हुई जिसके बाद कोर्ट ने उनकी याचिका को स्वीकारते हुए अग्रिम जमानत पर मुहर लगाई. अग्रिम जमानत याचिका की जस्टिस सुनील कुमार परमार ने की और पूर्व कानून मंत्री को बड़ी राहत दी. 

कार्तिक सिंह से जुड़ा पूरा मामला वर्ष 2014 का है। बिहटा में राजीव रंजन उर्फ राजू सिंह का अपहरण हुआ था. इसे लेकर पटना जिले के बिहटा थाने में एफआईआर दर्ज है. इस मामले में मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह सहित कई अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया था. बाद में राजू सिंह के बयान पर इसमें कार्तिक सिंह सहित कुछ अन्य लोगों के नाम भी आरोपी के रूप में जोड़े गए. कार्तिक सिंह ने पटना हाईकोर्ट में 2017 में भी अग्रिम जमानत याचिका की अर्जी लगाई थी. उन्होंने अपनी याचिका में कोर्ट को जानकारी दी थी कि प्राथमिकी में उनका नाम नहीं था. उन्होंने कोर्ट को बताया है कि पीड़ित और सूचक ने उनका नाम इस घटना के संबंध में नहीं लिया है. वे घटना के दिन वहां नहीं थे. उनका नाम कुछ महीनों के बाद इसमें जोड़ा गया. 

इस बीच, इसी साल हुए एमएलसी चुनाव में कार्तिक सिंह राजद की टिकट पर चुनाव जीत गए. बाद में जब अगस्त 2022 में राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ और नीतीश कुमार ने राजद सहित सात दलों वाली महागठबंधन सरकार बना ली तब कार्तिक मास्टर को मंत्री बनाया गया. कहा गया कि कार्तिक सिंह पर वारंट था. उन्‍हें 16 अगस्त को कोर्ट में सरेंडर करना था. लेकिन, वे 16 अगस्त को मंत्री पद की शपथ ले रहे थे. इसे लेकर भाजपा ने कार्तिक मास्टर और नीतीश-तेजस्वी सरकार के खिलाफ हमला बोल दिया. विशेषकर राज्यसभा सांसद सुशील मोदी ने कार्तिक मास्टर पर जमकर प्रहार किया. हालांकि कार्तिक सिंह ने स्पष्ट किया था कि उन्हें दानापुर की अदालत से इस मामले में 1 सितम्बर तक नो-कोरसिव यानी किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई से छूट मिली हुई है. 

राजनीतिक विवाद बढने और कोर्ट से अग्रिम जमानत नहीं मिलने के बाद मंत्री पद की शपथ लेने के 15 दिनों के बाद ही कार्तिक मास्टर ने मंत्री पद छोड़ दिया. इस बीच उनकी याचिका पर पटना हाई कोर्ट में कई दौर की सुनवाई की तारीखें आई लेकिन मामला अलग अलग कारणों से लटका रहा. वहीं मोकामा में हुए विधानसभा उपचुनाव में राजद प्रत्याशी नीलम देवी के पक्ष में कार्तिक सिंह के चुनाव प्रचार करने के कारण भाजपा ने फिर से उन्हें फरारी बताकर बिहार पुलिस पर सवाल उठाया था. इस बार पटना एसएसपी ने साफ किया कि कार्तिक मास्टर फरार नहीं हैं और कोर्ट ने उन्हें गिरफ्तार करने का कोई आदेश नहीं दिया है. 

पिछले बुधवार को भी इस मामले की सुनवाई हुई थी लेकिन पटना हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई 9 नवंबर तक टाल दी. बुधवार को हुई सुनवाई में कार्तिक सिंह उर्फ़ मास्टर की याचिका को स्वीकारते हुए न्यायाधीश सुनील कुमार परमार ने उन्हें अग्रिम जमानत दे दी. कार्तिक मास्टर को जमानत मिलने से अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को भी बड़ी राहत मिली है. इससे भाजपा के कार्तिक मास्टर के नाम पर सरकार को घेरने के मुद्दे पर कोर्ट ने बड़ा झटका दे दिया है. वहीं क़ानूनी विवादों में घिरे पूर्व कानून मंत्री कार्तिक सिंह उर्फ़ मास्टर के लिए भी सुकून की खबर आई है.



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