महामारी और मौत में मौज मारने वाली सरकार की दरकार बिहार को नहीं, गरीबों की आह के सैलाब में बह जाएगा सुशासन- अभिषेक झा

महामारी और मौत में मौज  मारने वाली सरकार की दरकार बिहार को नहीं, गरीबों की आह के सैलाब में बह जाएगा सुशासन- अभिषेक झा

Patna: कोरोना महामारी से बचने के लिये सरकार ने लॉक डाउन लगाया ताकि लोग इस खूनी वायरस के संक्रमण से बच सकें. दूसरी तरफ इसी लॉक डाउन ने समाज मे अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की अग्निपरीक्षा ही शुरू कर दी है. रालोसपा के प्रवक्ता अभषेक झा कहते हैं कि देखिये कैसे एक बड़ा वर्ग जिसके सर पर न तो कोठरी है और न हीं हाथ मे अनाज की मोटरी है उसके लिए संक्रमण से बचने के लिए लगाया गया लॉक डाउन मौत का कारण बनने लगा. लॉक डाउन के बीच ही यह वर्ग संक्रमण से बेपरवाह भूख से लड़ता हुआ सड़क पर आ निकला फिर निकल गया वैसी सरकारों का जनाजा जो सिर्फ वायदे की नुमाइश पर अपनी सत्ता को सुरक्षित रखने की कोशिश में लगी रहती है.

गरीबों के कलेजे से उठ रही आह के दरिया में सुशासन का डूबना तय है
युवा नेता अभिषेक झा कहते हैं कि इस महामारी ने केंद्र और बिहार सरकार के चेहरे पर लगा मुखौटा उतार दिया है. मजदूरी तो खुद ही हमारी से कम नहीं उप पर से आये कोरोना संकट ने  इन दोनों सरकारों के हृदयहीनता के अनगिनत दृश्य पेश किए हैं. भूखे पेट,नंगे पैर,विवशता में  सड़कों पर पैदल चलता लाखों की संख्या में मजदूरों का जत्था मध्ययुगीन काल में होने का अहसास करवाता है. ऐसा लगता ही नहीं जनता के द्वारा चुनी गई कोई लोकतांत्रिक सरकार सत्ता में है. यहां तो महामारी और मौत के बीच सुशासन के नाम भ्र्ष्टाचार रूपी दुःशासन का नंगा नाच चल रहा है. प्रवासी मजदूरों के नाम पर चलाये जा रहे क्वारनटीन में असुविधा को लेकर प्रतिदिन बवाल मच रहा है तो दूसरी तरफ सरकारी अमला लूट मचाने में मस्त है. मुख्यमंत्री जी क्वारन्टीन सेंटर का दर्शन लाभ भी ले रहे हैं लेकिन उन्हें बिहारियों का दर्द नहीं पता चल रहा. कहा जाता है कि सावन के अंधे को हमेशा हर ही दिखता है. यही हाल बिहार के नेतृत्व का है. संवेदना जैसे शब्द से सुशासन का कोई वास्ता नहीं. अगर ऐसा होता तो लाखों की संख्या में मजदूर सड़कों पर नंगे पैर रेंगने को मजबूर नहीं होते.

रोम जल रहा है और नीरो बंसी बजा रहा है..
बिहार की सत्ता का हाल रोम के उस बेपवाह नीरो की तरह है की जब रोम जल रहा था तो नीरो बंसी बजा रहा था. बिहार सरकार और उसके पदाधिकारी स्वयं महामारी साबित हो रहे हैं.  न तो कोरोना टेस्ट हो पा रहा है न हीं बाहर से आ रहे प्रवासियों की सही ढंग से देख भाल,,,क्वारन्टीन सेंटर लूट का अड्डा बन गया है। आये दिन ऐसे केंद्रों पर बाहर से आये लोग असुविधा के नाम पर बवाल काट रहे हैं। सरकार सतर्कता का स्वांग रच रही है। जनता सब समझ रही है। आने वाले समय मे गरीबों के कलेजे से निकली आह के सैलाब में सुशासन का बहना तय है।

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