भाजपा को रास नहीं आई राजद की ‘सुनवाई’, रामसागर का तेजस्वी से सवाल – किसने दिया जज बनकर सुनवाई का अधिकार

भाजपा को रास नहीं आई राजद की ‘सुनवाई’, रामसागर का तेजस्वी से सवाल – किसने दिया जज बनकर सुनवाई का अधिकार

पटना. जनता की समस्याओं को सुनने के लिए राजद की ओर से ‘सुनवाई’ नाम से जनता दरबार की शुरुआत की गई है. अब राजद की सुनवाई पर भाजपा ने सवाल दागा है. भाजपा ने सवाल किया है कि देश में सुनवाई करने का अधिकार सिर्फ जजों को है, फिर राजद को कैसे सुनवाई करने का अधिकार मिल गया. भाजपा प्रवक्ता डॉ रामसागर सिंह ने सुनवाई नाम रखने पर राजद की मानसिकता पर सवाल किया है. रामसागर सिंह ने कहा कि जब केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी तब भाजपा दफ्तर में ‘सहयोग’ नाम से जनता की समस्याओं को सुनने की शुरुआत की गई थी. उसी से सीखकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार में अपने कार्यालय में जनता दरबार की शुरुआत की. नीतीश कुमार का जनता दरबार अटल बिहारी के सहयोग का ही नकल है. 

उन्होंने तंज कसते हुए जदयू को मालिक और केयर टेकर वाली पार्टी करार दिया. इसके मालिक नीतीश कुमार और केयर टेकर ललन सिंह हैं. रामसागर सिंह ने कहा कि जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की कार्यशैली है कि जेडीयू जमींदार की पार्टी है. इसलिए जमींदार वाली पार्टी जदयू ने जनता दरबार नाम रखा है. अब राजद भी बीजेपी के सहयोग कार्यक्रम का नक़ल करते हुए ‘सुनवाई’ नाम रखी है. यह दिखाता है कि राजद जज वाली पार्टी है. यानी जैसे जजों को सुनवाई करने का अधिकार है उसी मानसिकता से राजद चलता है. जमींदार वाली पार्टी जदयू से एक कदम आगे बढ़कर राजद अब सुनवाई करने लगी है. 

दरअसल, राजद ने प्रत्येक मंगलवार को जन समस्याओं को सुनने के लिए सुनवाई नाम से जनता दरबार की शुरुआत की है. मंगलवार से शुरू हुई सुनवाई से पहले दिन राजद के वरिष्ठ नेता और भूमि सुधार विभाग सहित गन्ना उद्योग विभाग के मंत्री आलोक मेहता और आईटी मंत्री मो. इसराईल मंसूरी सुनवाई कर रहे हैं. राजद में इस प्रकार से जन समस्या को सुनने की शुरुआत पहली बार की गई है. लेकिन इसका नाम सुनवाई रखना भाजपा को रास नहीं आया है और रामसागर ने बड़ा सवाल किया है. 


उन्होंने कहा कि भाजपा के सहयोग की नकल करने वाले जदयू और राजद को नकल के लिए भी अक्ल की जरूरत है यह भूल गए हैं. वे सुनवाई कर रहे हैं जबकि इसका अधिकार सिर्फ जजों को है. इसके पहले भाजपा के अन्य नेता भी सुनवाई को लेकर सवाल दाग चुके हैं कि आखिर किस अधिकार से तेजस्वी यादव भी सीएम नीतीश की तर्ज पर अलग से सुनवाई कर रहे हैं. 


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